Search

धनबाद: झामुमो के अंतर्कलह में गौण पड़े जनता के मुद्दे, कार्यकर्ता भी मायूस

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)  धनबाद जिले में झारखंड मुक्ति मोर्चा लंबे समय से नेतृत्वविहीन रहा. बिना कप्तान पार्टी की गतिविधियां लगभग ठप पड़ी रही. अब तक जिलाध्यक्ष व जिला कमेटी की घोषणा भी नहीं हुई है. दूसरी ओर केंद्रीय नेतृत्व ने 15 फरवरी को महानगर कमेटी की घोषणा की तो विरोध भी शुरू हो गया. पार्टी में गतिरोध व अंतर्कलह के कारण आम जनता के मुद्दे गौण पड़ गए हैं. हाल के दिनों में केंद्र का बजट हो या गैस की कीमत में एकमुश्त 50 रुपये की वृद्धि, झामुमो को कोई लेना देना नहीं. बात बात पर मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने वाली पार्टी शांत पड़ी हुई है. एक बयान तक कोई नेता जारी नहीं कर रहा. नेतृत्व की कमजोरी से व्यथित पार्टी के कार्यकर्ता भी शिथिल पड़े हुए हैं.

2024 चुनाव को लेकर भी पार्टी रेस नहीं

वर्ष 2024 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव को ले कर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा रेस हो चुकी है. लेकिन झामुमो अंदरुनी कलह से से जूझने में व्यस्त है.

 पूर्व जिलाध्यक्ष और सचिव के बीच शीत युद्ध

पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश टुडू और सचिव पवन महतो का आपसी विवाद सार्वजनिक हो चुका है. इसी वजह से केंद्रीय कमेटी ने जिला कमेटी को भंग कर दिया था. पिछले तीन महीने से जिला की पार्टी बगैर कप्तान के चल रही है. 4 फरवरी को स्थापना दिवस समारोह में भी कप्तान के नहीं रहने के कारण कई बार असहज स्थिति देखने को मिली..

 नई कमेटी के तीन सदस्यों ने दिया इस्तीफा

15 फरवरी को जैसे ही झामुमो के अधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में धनबाद महानगर की कमेटी मंटू चौहान की अध्यक्षता में घोषित की गई. ठीक 10 मिनट बाद ही केंद्रीय नेतृत्व को पत्र लिखकर नई कमेटी में उपाध्यक्ष बनाए गए अमित महतो, हेमंत कुमार सोरेन और संयुक्त सचिव समीर रवानी ने अपना इस्तीफा दे दिया. इन्होंने मंटू महतो की अध्यक्षता का विरोध किया है. यह भी पढ़ें:  धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-builders-henchmen-beat-up-residential-people-in-city-center/">धनबाद

: सिटी सेंटर में बिल्डर के गुर्गों ने आवासीय लोगों को पीटा [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp