Katras : दुर्गा कालोनी कतरास में भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवचन में काशी के सुविख्यात आचार्य कन्हैया द्विवेदी ने कहा कि प्रभु इस धरती पर केवल पापियों का वध करने नहीं, बल्कि भक्तों, संतों के मनोरथ पूर्ण करने आते हैं. भगवान अवगुण नहीं देखते हैं, अवगुण देखने का काम जीवात्मा करता है. परमात्मा तो गुण देखते हैं और रीझ जाते हैं. उन्होंने कहा कि पूतना में कितना अवगुण था, स्तन में विष लगाकर कृष्ण को मारने आई थी. परंतु प्रभु ने उसे मातृत्व का स्थान दिया. प्रभु कहते हैं पूतना जहर देने आई थी, पर काम मां जैसी कर रही थी. इसलिए प्रभु ने उसे मुक्त कर दिया. भगवान माखन चुराने नहीं आते थे. उनके यहाँ तो नौ लाख गायें थी, दूध दही माखन का भंडार था. वह गोपियों के मनोरथ पूर्ण करने आते थे. गोपियों के हृदय चुराने आते थे. भगवान प्रकृति के संरक्षक हैं. अतः प्रकृति पूजा के पक्षधर थे. पर्वत व गायों की पूजा करते थे. इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए प्रभु ने उनकी पूजा ही बंद करा दी व गिरिराज की पूजा शुरू कर दी. माखन चोरी एवं गिरिराज की जीवंत झांकी दिखाकर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया. मौके पर यज्ञ समिति के नकुल चन्द्र दास, सरिता देवी, जानकी देवी, विनोद तिवारी, विनोद सिंह, विमला देवी, सोनी देवी, राजेश कुमार, गुरू भगत, इन्द्रनाथ विश्वकर्मा आदि मौजूद थे. [wpse_comments_template]
धनबाद: पूतना आई थी कृष्ण को जहर देने व कर रही थी मां जैसा व्यवहार : आचार्य
Last Updated: May 30, 2023 12:00 AM (IST)