पिछले साल विस्थापितों की तैयार हुई थी सूची
वर्ष 2021 के अक्तूबर माह में जिला प्रशासन ने फ्लाईओवर से विस्थापित होने वाले परिवारों की सूची तैयार की थी. सूची में 220 परिवारों को चिह्नित किया गया था. साथ ही उन्हें हीरक रोड में बसाने का निर्णय हुआ था. लेकिन आठ माह बाद भी जिला प्रशासन का कोई अधिकारी दुबारा इन परिवारों से संपर्क साधने नहीं आया. इस पूरे मामले पर अधिकारी मौन साधे हुए हैं.योजना की डिजाइन पर रेलवे जता चुका है आपत्ति
विस्थापितों के साथ मटकुरिया फ्लाईओवर के रास्ते में रेलवे भी एक रोड़ा है. केंद्र और राज्य के बीच पहले से तू तू- मैं मैं चल रही है. ऐसे में रेलवे से एनओसी लेना भी आसान नहीं है. रेलवे कुछ दिन पहले ही इस योजना की डिजाइन पर आपत्ति जता चुका है. यह फ्लाईओवर रेलवे की दो लाइन पार कर वासेपुर पहुंचेगी. फ्लाईओवर ब्रिज, अंडरपास व सड़क निर्माण कार्य स्टेट हाईवे ऑथोरिटी ऑफ झारखंड, पथ निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा. लागत राशि 280 करोड़ का खर्च डीएमएफटी धनबाद वहन करेगा. मटकुरिया से आरा मोड़ तक फ्लाईओवर, फिर वहां से बिनोद बिहारी चौक तक प्रस्तावित सड़क में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के साथ रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) बनाने की भी योजना है. जमीन से जुड़े मामले और विस्थापन के मुद्दे पर जब धनबाद सीओ प्रशांत कुमार लायक से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-13-acres-of-land-lost-due-to-negligence-of-pk-roy-college/">धनबाद:पीके रॉय कॉलेज की लापरवाही के कारण हाथ से निकली 13 एकड़ जमीन [wpse_comments_template]

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