धनबाद: नाम का सुमिरन भगवत प्राप्ति का श्रेष्ठ माध्यम : विजय कौशल
Nirsa : निरसा (Nirsa) श्रीराम कथा के पांचवें दिन 3 जनवरी मंगलवार को व्यासपीठ से बोलते हुए प्रखर कथावाचक संत विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि भगवत दर्शन की यात्रा हेतु किसी तैयारी की जरूरत नहीं होती है. जिस आसन, जिस व्यवस्था में रहते है उसी में आगे बढ़ना चाहिए. लोभ, मोह, काम, क्रोध, पाप, मिलावट को त्यागने से ही भगवान मिलते है. पाप को छोड़ने में शक्ति यानी ऊर्जा नहीं लगानी चाहिए बल्कि ईश्वर भक्ति के प्रति अपना समय खर्च करना चाहिए. महाराज श्री ने कहा कि भगवान परीक्षा से नहीं मिलते बल्कि प्रतीक्षा से मिलते हैं. सांसारिक क्रिया में सदैव जागे रहना जीव को सुला देता है जबकि भगवान की भक्ति में जागे रहना उसे जागृत कर देता है. कल की कथा में प्रभु श्रीराम के प्राकट्य के कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आज महाराज श्री ने बताया कि माया का संग्रह नहीं करना चाहिए बल्कि मायापति के दर्शन की कोशिश होनी चाहिए. दुःख का समय बहुत कष्ट से कटता है लेकिन सुख में, आनंद में समय कब गुजर जाता है पता नहीं चलता. जीवन श्रेष्ठ माध्यम से चलने, चलाने का कारण मात्र भजन या नाम सुमिरन है. कथा आरंभ होने से पहले पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, देवघर क्षेत्र के विधायक नारायण दास और धनबाद भाजपा ग्रामीण के जिलाध्यक्ष ज्ञानरंजन सहित कई प्रमुख लोगों ने महाराज से आशीर्वाद ग्रहण किया. [wpse_comments_template]

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