न्यूजीलैंड के जरनल में पब्लिश हुई रिसर्च
[caption id="attachment_408763" align="aligncenter" width="220"]alt="" width="220" height="300" /> जंतु विज्ञानी डॉ तापस चटर्जी[/caption] डॉ चटर्जी ने बताया कि उनके अध्ययन को न्यूजीलैंड के विश्वस्तरीय जरनल जूटैक्सा में 26 अगस्त 2022 को पब्लिश किया गया है. यह रिसर्च जरनल के वॉलियम 5178 के पेज नंबर 293-300 तक प्रकाशित हुई है.
रूस के वैज्ञानिक के साथ की रिसर्च
डॉ चटर्जी के साथ उनकी रिसर्च में सीएसआईआर मुंबई के वरीय वैज्ञानिक सह राष्ट्रीय समुद्र अनुसंधान केंद्र के डॉ सब्यसाची साउटिया और रूस के वैज्ञानिक डॉ इगोर डॉबगल भी शामिल थे. रिसर्च के लिए इंडियन ओसियन से सेडीमेंट (पानी का सैंपल) डॉ सव्यसाची ने एकत्र किया था. हाई मैग्नीफिकेशन में इसका फोटो लिया गया. इसका आकार 74-87 माइक्रोन के बीच पाया गया है.खोज का क्या मिलेगा लाभ
डॉक्टर चटर्जी ने बताया कि नई प्रजाति की खोज के बाद उसका अध्ययन जारी है. इससे आने वाले दिनों में जैविक विकास क्रम को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही जीवन के विकास क्रम एवं परजीवियों के व्यवहार को समझने में यह रिसर्च मील का पत्थर साबित हो सकता है. रिसर्च के अगले क्रम में इस का मानव जीवन पर प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा.अब तक 137 नई स्पीशीज की कर चुके हैं खोज
डॉ तापस चटर्जी अब तक विश्व के अलग-अलग देशों के सैकड़ों वैज्ञानिकों के साथ रिसर्च कर 137 नई स्पीशीज की खोज कर चुके हैं,जिनमें 4 न्यू जेनेरा (जेनस) की भी खोज शामिल है. अब तक उनके 175 रिसर्च पेपर विश्व के अलग-अलग प्रतिष्ठित जनरल में प्रकाशित हो चुके हैं. डॉ तापस 25 इंटरनेशनल जरनल के रेफरी भी हैं. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-people-are-getting-employment-due-to-duck-farming-in-baghmara/">धनबाद: बाघमारा में बत्तख पालन से लोगों को मिल रहा रोजगार [wpse_comments_template]

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