गौमाता की सेवा अत्यंत सुखदायनी
कृष्णप्रियाजी ने कहा कि सनातन धर्म में सभी वर्गों को भगवान का ही अंश माना गया है. प्रभु का सर्वस्व पवित्र है. इसलिए किसी से भेदभाव न करें और सभी में ईश्वर का दर्शन करें. उन्होंने कहा कि सनातनी होना हमारा सौभाग्य है. हमारे यहां ईश्वर के साथ- साथ प्रकृति को भी पूजा जाता है. सभी सनातनियों को एकजुट होकर हिन्दू धर्म को बढ़ावा देना चाहिए. जिससे हमारी अति प्राचीन संस्कृति सुरक्षित हो सके. उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो औरों के लिए जीता है, उनका सहारा बनता है, उसे भगवान सेवाभाव से ही प्राप्त हो जाते हैं. एक मूक पशु-पक्षी भी अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं, लेकिन भगवान ने मनुष्य को दान देने की प्रवृत्ति दी है, सेवा करने की प्रवृत्ति दी है, जिससे वह अपने साथ-साथ औरों का जीवन भी सुखमय बना सकता है. उस पर भी गौमाता की सेवा अत्यंत सुखदायनी है. गौमाता की सेवा केवल आपका ही नहीं, अपितु आपके पितरों का भी कल्याण करती है.
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alt="" width="150" height="150" />सुदाम और कृष्ण की दोस्ती और फूल की होली ने मोहा मन
विश्राम दिवस पर कृष्णप्रियाजी ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा मित्र वही होता है, जो विपत्ति के समय अपने मित्र के काम आए. झांकी के द्वारा कृष्ण-सुदामा की मित्रता को दिखाया गया. फूल की होली का आयोजन किया गया. शक्ति मंदिर परिसर कृष्ण के जयकारे से गूंजता रहा. कथा के दौरान झरिया विधायिका पूर्णिमा नीरज सिंह ने कथावाचिक कृष्णप्रियाजी का आशीर्वाद लिया. कृष्णप्रियाजी ने माला पहनाकर आशीर्वाद दिया. संजय सांवरिया, अनिल खेमका को भी सम्मानित किया गया. यह भी पढ़ें : कांग्रेस">https://lagatar.in/dhanbad-congresss-75-km-long-glory-journey-begins/">कांग्रेसकी 75 किलोमीटर की लंबी गौरव यात्रा शुरू [wpse_comments_template]

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