Dhanbad : जिले में एक ओर जागरूकता अभियान चलाकर भूगर्भीय जलस्तर बढ़ाने के लिए लोगों को जल के संरक्षण के लिए शपथ दिलाई जा रही है, दूसरी ओर अभियान के नाम पर नगर निगम का लीपापोती का खेल भी जारी है. चार साल पहले सरकारी कार्यालयों और पार्क में बने कई रिचार्ज पीट के नामों निशान मिट चुके हैं, जबकि कुछ के मिटने के कगार पर है. आवासीय कालोनियों की बात करें तो 7.5 डिसमिल या उससे अधिक बिलडप एरिया में बने भवन या बहुमंजिला इमारतों में वर्षा जलसंग्रह की व्यवस्था करना अनिवार्य है. निगम क्षेत्र के सिर्फ धनबाद अंचल में ही 52 हजार हाउस होल्ड है, लेकिन सिर्फ 18 हजार घरों में ही वर्षा जलसंग्रह की व्यवस्था है. नियमत: वर्षा जलसंग्रह नहीं करने वाले भवनों से होल्डिंग टैक्स की राशि का डेढ़ गुना अधिक टैक्स लेने का प्रावधान है. लेकिन यह जुर्माना 350-400 लोगों से ही लिया जाता है. भाजपा के एक नेता ने निगम पर आरोप लगाते हुए बताया कि वर्षा जलसंग्रह के नाम पर बहुत गड़बड़ी हो रही है. निगम की एजेंसी अपार्टमेंट या बड़े भवनों में रहने वाले लोगों से पैसा लेकर जुर्माने की राशि माफ करवा देती है. इसमें सही से जांच हुई तो एजेंसी के कई लोग फंसेंगे.
टैक्स संग्रह करने वाली कम्पनी ने झाड़ा पल्ला
इस संबंध में टैक्स का काम देख रही श्री पब्लिकेशन के मैनेजर ने बताया कि वर्षा जलसंग्रह की जांच निगम द्वारा कराई जाती है, हमलोग जांच नहीं करते है. हमारे पास जांच रिपोर्ट आता है, उसी के अनुसार उनका टैक्स या जुर्माने की राशि तय की जाती है. इसके बाद भी हमारा कोई आदमी जुर्माना माफ कराने के बदले रिश्वत मांगता है तो इसकी शिकायत निगम में या हमारे कार्यालय में करनी चाहिए. रिश्वत मांगाने वाले पर करवाई के साथ टैक्स पेयर की जुर्माने की राशि भी वसूली जाएगी. लेकिन अभी तक एसी कोई शिकायत हमारे पास या निगम में नहीं आई है. यह भी पढ़ें:
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