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धनबाद : सेल्फ हेल्प ग्रुप के जरिए 10 हजार में शुरू किया व्यवसाय, अब हर माह लाखों की कमाई

नगर निगम के अधीन शहर में सक्रिय हैं 2310 महिला स्वयं सहायता समूह

Mithilesh Kumar   Dhanbad : सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं. स्वयं सहायता समूह का गठन कर खुद के साथ-साथ दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं. नगर निगम के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में कुल 2310 सेल्फ हेल्प ग्रुप एक्टिव हैं, जिसमें आधी से अधिक मुस्लिम महिलाएं हैं, जो सिलाई, बुनाई, चूड़ी, टैडीबीयर, झालर, अगरबत्ती, सर्फ, साबुन आदि बनाकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं. महिलाओं के इस प्रयास से परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है. शहर के पांडरपाला में संचालित फातिमा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने करीब 6 साल पहले 10 हजार रुपए में कारोबार शुरू किया, अब हर महीने लाखों रुपए की कमाई हो रही है.

फरहीन नाज ने वर्ष 2017 में किया था स्वयं सहायता समूह का गठन

  [caption id="attachment_648427" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/silai-300x171.jpeg"

alt="" width="300" height="171" /> सिलाई के काम में जुटीं फातिमा ग्रुप की महिलाएं[/caption] धनबाद के वार्ड 18 के पांडरपाला में सक्रिय फातिमा स्वयं सहायता समूह की फरहीन नाज ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में समूह का गठन किया था. शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन नगर निगम से प्रशिक्षण लेने के बाद हौसला बढ़ा. 10 हजार रुपए से हमलोगों ने काम शुरू किया. रोजगार को आगे ले जाने की जिद थी, इसलिए बिना किसी झिझक के काम करते हैं, जिसका फायदा भी मिल रहा है. हर माह लाखों रुपए की आमदनी हो रही है. ग्रुप की महिलाएं सिलाई के साथ-साथ चूड़ियां बनाने का भी काम कर रही हैं. ग्रुप में कुल 70 महिलाएं हैं. प्रत्येक महिला हर महीने 5 हजार रुपए से अधिक की आमदनी कर रही हैं. स्कूल की पोशाक व शादी के कपड़ों की सिलाई का ऑर्डर लेती हैं. ग्रुप की बनाई चूड़ियों की भी काफी डिमांड है.  इस काम में उन्हें परिवार के लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. धी

परिवार में हर महीने 15 हजार का सहयोग करती हैं सादाब जमीर

वार्ड 19 के नया बाजार में रहने वाली सादाब जमीर ने बताया की वर्ष 2017 में उन्होंने शेरम हेल्प ग्रुप बनाया था. वर्तमान में ग्रुप से 150 महिलाएं जुड़ चुकी हैं. ग्रप की महिलाएं सॉफ्ट टॉय, फ्लावर पॉट, झालर, झूमर आदि का निर्माण करती हैं. जमीन बताती हैं कि हमारा प्रोडक्ट सिर्फ धनबाद ही नहीं कोलकाता, पटना, रांची जैसे शहरों में भी पहुंच रहा है. प्रोडक्ट होलसेल मार्केट में भी उपलब्ध कराते हैं. इससे हर महीना 80 हजार रुपया की आमदनी हो जाती है. समूह से जुड़ी हर महिला 1500 से 2000 रुपया घर बैठे कमाती है. मैं खुद अपने परिवार में हर महीना 15 हजार का योगदान देती हूं. प्रोडक्ट निर्माण के साथ वह दूसरी महिलाओं को ट्रेनिंग भी दे रही हैं.

त्योहारों में होती है अच्छी कमाई

श्री गणेश स्वयं सहायता समूह की संगीत कुमारी महतो ने बताया कि 10 अक्टूबर 2022 को उन्होंने समूह का गठन किया था. पीजी की पढ़ाई के बाद खुद से कुछ करने की तमन्ना थी, इसलिए ग्रुप का गठन किया. पहली बार 10 हजार से झालर बनाने का काम शुरू किया. लोगों को हमारा काम पसंद आने लगा. बाजार में प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ने लगी. आज हमलोग झालर के साथ ही विवाह की सामग्री भी तैयार करते है. उत्पाद की बिक्री शहर के पुराना बाजार के अलावा ऑनलाइन भी हो रही है. त्योहार के सीजन में अच्छी आमदनी होती है. फिलहाल ग्रुप की हर सदस्य को प्रत्येक महीने 2 हजार रुपए तक आमदनी हो रही है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/full-committee-of-dhanbad-district-jmm-formed-after-6-months-list-released/">धनबाद

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