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धनबाद : ऐसा सदमा कि पिता की मौत के 9 महीने बाद भी बेटी बोली… जिंदा हैं पापा

6 माह बिना बिजली वाले कमरे में बंद रहीं मां-बेटी, डालसा ने की काउंसिलिंग

Dhanbad : धनबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) समाज के जरूरतमंद लोगों तक नि:शुल्क कानूनी सहायता पहुंचाने के साथ ही सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है. डालसा ने दो तबाह होती हुई जिंदगियों को बचाने का काम किया है. मामला परिजन की मौत के सदमे में आकर पिछले छह महीने से एक ही कमरे में बंद मां-बेटी से जुड़ा है. वो भी उस कमरे में जिसकी बिजली भी कटी हुई थी. दोनों मां-बेटी अंधेरे में मृत परिजन के होने का अहसास कर रही थी. जज ने दोनों की कई घंटों तक काउंसिलिंग के बाद सामान्य हालत में लौटाने का प्रयास किया. डालसा दोनों को अब चिकित्सकीय सलाह भी दिलाएगी. घटना सरायढेला थाना क्षेत्र के श्री शिव शक्ति अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 104 और 102 की है. लतिका अग्रवाल और उनकी बेटी स्वाति अग्रवाल पिछले 6 महीने से फ्लैट के कमरे में बंद थीं. मटकुरिया में रहने वाली बड़ी बेटी स्वस्थि अग्रवाल के आवेदन पर डालसा ने संज्ञान लिया. मंगलवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा के निर्देश पर अवर न्यायाधीश राकेश रोशन ने स्पेशल टीम का गठन किया. टीम में डॉ राजीव कुमार, मनोरोग चिकित्सक डॉ मिनाक्षी, काउंसिलर अभिषिक्ता मुखर्जी, एलएडीसीएस डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट, डालसा सहायक राजेश सिंह, अरुण कुमार, थाना प्रभारी नूतन मोदी व पुलिस के जवान अपार्टमेंट पहुंचे. इसके बाद मां-बेटी की काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई. वहां जाने पर पता चला कि कमरे का बिजली कनेक्शन छह महीने से कटा है. मां और बेटी अंधेरे में ही रहती थीं. किसी के पास जाना या मिलना-जुलना बिल्कुल बंद था. पहले तो मां-बेटी ने टीम के साथ बात करने से ही मना कर दिया. करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद वे राजी हुईं.

पिता की मौत के बाद दोनों को लगा गहरा सदमा

डालसा को दिए आवेदन में स्वस्थि अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता चंद्रप्रकाश अग्रवाल बीसीसीएल में अधिकारी थे. सेवानिवृत्ति के बाद 12 अक्टूबर 2023 को उनका निधन हो गया. उस दिन मां लतिका अग्रवाल व छोटी बहन स्वाति अग्रवाल शव के साथ करीब सात घंटे तक अपने कमरे में ही रहीं. सरायढेला पुलिस, सोसायटी के लोग व प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद लाश को कमरे से बाहर निकला गया था और अंत्येष्टि के लिए भेजा गया था. तब से मां-बेटी सदमे में ही हैं. धीरे-धीरे वे अंधेरे में रहने को आदि होने लगीं. ये देखकर बड़ी बेटी स्वस्थि अग्रवाल ने मामले की खबर डालसा और विभाग के अधिकारियों को दी. डालसा के अध्यक्ष प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा के आदेश पर रातों-रात मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया.

मेरे पापा जिंदा हैं, साजिश कर रहे लोग…

अवर न्यायाधीश सह डालसा के सचिव राकेश रोशन व डॉ राजीव ने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान स्वाति अग्रवाल ने टीम से कहा कि उसके पापा जिंदा हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है. पापा हमेशा हमारे साथ ही रहते हैं... उनके साथ षडयंत्र किया गया है. इसलिए बिजली और लाइट का प्रयोग नहीं करते हैं. किसी प्रकार से मां बाहर से खाने की चीजें लाती है. काउंसिलिंग के बाद मां-बेटी इलाज के लिए राजी हुईं. मनोचिकित्सक और काउंसिलर ने भी काफी काउंसिलिंग की. घंटों बाद दोनों सामान्य जीवन जीने के लिए भी राजी हो गईं. दूसरी ओर अपार्टमेंट के लोगों का भी कहना था कि दोनों मां-बेटी एकदम अलग रहती हैं. काउंसिलिंग के बाद अपार्टमेंट के लोगों ने भी राहत की सांस ली है. [wpse_comments_template]

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