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धनबाद: सुडा के निदेशक ने शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की जांच का दिया आदेश

 
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)  शहरी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के नाम पर घोटाले का मामला एक बार फिर नगर निगम पहुंचा है. केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं. इस अलोक में राज्य के शहरी विकास अभिकरण (सुडा) ने धनबाद डीसी से जबाब मांगा है. ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में खुले में शौच से मुक्ति दिलाने (ओडीएफ) के लिये निगम के अधिकारियों ने खूब तेजी दिखाई थी. 42 हजार 300 शौचालय निर्माण का दावा कर 2 अक्टूबर 2017 को निगम क्षेत्र को ओडीएफ भी घोषित किया गया था. इसके पांच माह बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने 6.36 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी. निगम के अधिकारियों को जांच का आदेश दिया. कई बार जांच शुरू भी हुई, लेकिन अधिकारी अपनी गर्दन फंसता देख शांत हो गए. न किसी पर एफआईआर हुई और न ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई.

  70 हजार शौचालय निर्माण का था लक्ष्य

नगर विकास विभाग ने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिये 70 हजार का लक्ष्य दिया था. अलग अलग वार्ड से 66 हजार आवेदन आए, लेकिन निर्माण 42 हजार 300 दिखाया गया. निगम स्तर पर जब मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि 20,000 लाभुकों का नाम सूची से डिलीट हो गया है.  जिनका नाम डिलीट हुआ, उनमें 12085 लाभुकों के खाते में राशि भेजी जा चुकी थी. भूली क्षेत्र में बीसीसीएल के बहुमंजिले भवनों में रहने वाले अधिकतर लोगों का नाम इसी सूची में शामिल था.

 जांच के नाम पर भी हुई खानापूर्ति

शौचालय निर्माण में गड़बड़ियों की जांच तत्कालीन नगर आयुक्त मनोज कुमार, राजीव रंजन, चंद्रमोहन कश्यप के साथ एसीबी और नगर विकास विभाग की टीम भी कर चुकी है. साथ ही शौचालय निर्माण के आंकड़े भी बदलते रहे है, कभी 42 हजार 300, कभी 40 हजार, 39 हजार, 36 हजार निर्माण की बात सामने आई, वहीं गड़बड़ी की बात करे तो कभी कहा गया 12085 फर्जी लाभुक हैं, तो कभी 9 हजार, 6 हजार, 5 हजार 300 या 3 हजार फर्जी लाभुकों की कहानी सामने आई.  अब कार्रवाई की बात करे तो पहले कहा गया 597 फर्जी लाभुक मिल गए, कभी 1200 तो कभी 2200, लेकिन कितने से पैसे वापस आये, कितने के खिलाफ एफआईआर हुई, इसका कुछ अता पता नहीं है. मतलब जांच के नाम पर सिर्फ गुमराह ही किया गया है.

  पूर्व पार्षद, पांच साल से कर रहे हैं शिकायत

शिकायतकर्ता सह वार्ड 26 के पूर्व पार्षद निर्मल कुमार मुखर्जी ने बताया कि वह पिछले पांच साल से प्रधानमंत्री कार्यालय सहित अन्य विभागों को शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की जांच की मांग करते आ रहे हैं. लेकिन जांच नहीं हुई है. पिछली बार  5 मई 2022 को शिकायत की गई थी. इसी के अलोक में सुडा के निदेशक ने 9 फरवरी को धनबाद उपयुक्त को जांच का आदेश दिया. शिकायत कर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि शौचालय निर्माण के नाम पर बिना पूरी जांच के रेवड़ी की तरह फर्जी लाभुकों के बीच राशि बांट दी गई. बिना पानी का इंतजाम किये जहां तहां मॉड्यूलर टॉयलेट बना दिये गए. बिना जमीन चिन्हित किये सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू कराया गया. सफाई एजेंसी वार्ड से कचरा उठाकर घनी आबादी के बीच डंप करती आ रही है. यह सब सच सबके सामने आना चाहिए.

 अभी कोई लेटर नहीं मिला है: कार्यपालक पदाधिकारी

धनबाद नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी मो अनीस का कहना है कि शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की जांच के लिए सुडा से कोई लेटर उन लोगों के पास नहीं आया है. समाहरणालय में आया होगा. जब उनके पास ऐसा कोई आदेश आएगा तो जांच की जाएगी. [wpse_comments_template]  
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