1949 में आए धनबाद, चिरकुंडा थाना के दारोगा बने
स्वतंत्रता सेनानी के पोते रवि चौबे ने बताया कि दादा जी आजादी के दो साल बाद यानी 1949 में धनबाद आये थे. चिरकुंडा थाना में सिपाही की नौकरी ज्वाइन की. बाद में यहीं थाना प्रभारी बन गए. बच्चों की पढ़ाई लिखाई को ध्यान में रखते हुए धनबाद के हीरापुर में स्थायी निवास बनाया. वर्ष 1985 में रिटायर हुए. तीनों बेटों की पढ़ाई लिखाई धनबाद में ही हुई. बड़ा होने के बाद बेटों को फ़ौज में भेजा. आज उनके बड़े बेटे चंदन चौबे फ़ौज से रिटायर भी हो चुके है. दादाजी का निधन वर्ष 2003 में 95 वर्ष की अवस्था में हो गया. वर्ष 2021 में उनकी पत्नी भी चल बसी.परिवार में आज भी है देश भक्ति का जुनून
रवि चौबे ने बताया कि मेरे परदादा के चार पुत्र थे, जिसमें तीन ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ दी. अलग अलग स्थानों से लड़े और बाद में भी देश सेवा से जुड़े रहे. उसके बाद की पीढ़ी भी देश सेवा में जुटी हुई है. दादा जी को भारत सरकार से ताम्रपत्र मिला था. इसके अलावा उन्हें पेंशन, आवास और ट्रेन में फर्स्ट एसी का पास भी मिलता था. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें एक पेट्रोल पंप भी देने को कहा था, लेकिन दादा जी ने ना कर दी. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-be-careful-if-you-go-to-dam-lake-water-fall-disaster-management-has-no-solution/">धनबाद:डैम, झील, वाटर फॉल जाएं तो रहें सावधान, आपदा प्रबंधन के पास नहीं कोई निदान [wpse_comments_template]

Leave a Comment