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धनबाद : झारखंड में तीसरा मोर्चा  बनाना चाहते हैं सूर्य सिंह बेसरा

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Baghmara :  झारखंड आंदोलनकारी घाटशिला के पूर्व बिधायक सह आजसू के संस्थापक सूर्य सिंह बेसरा ने कहा है कि झारखंड की स्थापना 22 वर्ष बीत गए, लेकिन सिर्फ सत्ता परिवर्तन हुआ, ब्यवस्था नहीं बदली है. किसी भी सरकार ने स्थानीय नीति बनाई ना नियोजन नीति बनाई. विस्थापन और आरक्षण नीति भी नहीं बनी. उन्होंने दामोदर ब्रिज पर धनबाद जाने के क्रम में कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों से एवं स्थानीय ग्रामीणों से मिले. बेसरा ने कहा कि यह झारखंड के पुनर्निर्माण का आगाज है. कहा कि धनबाद बोकारो से भाषा संस्कृति के मुद्दे पर जो ज्योत जलाई है, उसे ज्वाला बनाना है. पहले जल, जंगल जमीन लूटा, अब भाषा और संस्कृति पर हमला हो गया. झारखंड की जनता तीसरे बिकल्प की तलाश में है. झारखंड में संविधान के अनुच्छेद 345, 346, 347 के अधिकारों के तहत प्रादेशिक भाषाओं को जिनमें खोरठा, कुड़माली, संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया, नागपुरी, एवं पंचपरगनिया को अविलंब राजभाषा का दर्जा मिले. गैर झारखंडी भाषाओं का अतिक्रमण बंद हो. 1932 के खतियान या संविधान के अनुच्छेद 16(3) के तहत जिले के अंतिम सर्वे के आधार पर आंध्रप्रदेश के लिए बिशेष उपबंध अनुच्छेद 371(डी) की तर्ज पर स्थानीय नीति बने. झारखंड आंदोलनकारियों को चिन्हित कर अविलंब पेंशन योजना शुरू करने की भी मांग की. यह भी पढ़ें :">https://lagatar.in/nirsa-two-injured-one-critical-in-rajpura-ocp/">

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