Dhanbad : पूर्व सांसद सूरज मंडल ने कहा कि झारखंड के समुचित विकास के लिए यहां की सत्ता आंदोलनकारियों को मिलनी चाहिए. मूलवासी व आदिवासी ही राज्य को संकट से निकाल सकते हैं. बाहरी लोगों के सांसद-विधायक बनने से झारखंड का अब तक विकास की जगह विनाश ही हुआ है. सूरज मंडल 28 अगस्त को धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-case-on-2000-including-babloo-mahto-jagdish-rawani-jairam-of-massas-in-sindri-nuisance/">
(Dhanbad) के गांधी सेवा सदन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. राज्य में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं नहीं हों, इसके लिए झारखंड में बाहरी सांसद-विधायक व नेताओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से रोकना होगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने मूल उद्देश्यों से भटक गया है. 15 नवंबर 2000 को अलग राज्य बनने के बाद भी झारखंड 22 वर्षों से लागतार राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा है. इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार झारखंड के बाहर से आए वैसे नेता हैं, जो अपना हित साधने के लिए चुनव लड़कर एमपी और एमएलए बन जाते हैं. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-hemant-sarkar-is-set-to-leave-bjp-is-waiting-for-governors-decision-raghuvar/">धनबाद
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धनबाद : आंदोलनकारियों को मिले झारखंड की सत्ता- सूरज मंडल

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