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धनबाद : इस होड़ का दोष इलेक्शन के माथे

गोफ में झुलसे नंदन के परिवार के साथ खड़ी दिखीं विधायक पूर्णिमा व भाजपा नेत्री रागिनी सिंह

Rizwan Shams Dhanbad : झरिया में इन दिनों दो कद्दावर नेत्रियों के बीच जनता में सहानुभूति बांटने व उसके साथ खड़े होने की होड़ मची है. गोफ व गर्म ओबी में झुलस कर दम तोड़ने वाले नंदन और उसके परिजनों की ही मिसाल लीजिए. एक तरफ झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह पूरी तन्मयता से पीडि़त परिवार के साथ खड़ी दिखीं, तो दूसरी तरफ  भाजपा नेत्री रागिनी सिंह ने भी सहानुभूति व साथ देने में कोई कसर नहीं छोड़ा. दोनों नेत्रियों की आम जनता से जुड़ने की सीधी कोशिश वाकई सुकून देने वाली है. लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव ने इनसे यह क्रेडिट छीन लिया.  विधानसभा चुनाव, जो सिर उठाए खड़ा है, कभी भी एलान के साथ आ धमकेगा. माना जा रहा है कि दोनों नेत्रियों के बीच आम जनता से जुड़ने के साथ-साथ उनका भला करने और क्रेडिट लेने की होड़ मची. तभी तो इस परिवार को पूर्णिमा सिंह और रागिनी सिंह ने मुआवजा राशि के चेक को अपने-अपने हाथों से देकर और दुख की घड़ी में परिवार के लिए हमदर्द बनने का काम किया. [caption id="attachment_935762" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/dhanbad-the-blame-for-this-competition-lies-on-the-head-of-elections/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%80/"

rel="attachment wp-att-935762">https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/08/रागिनी.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> मृतक की पत्नी को मुआवाजा का चेक देतीं भाजपा नेत्री रागिनी सिंह[/caption] एक ही मुआवजा राशि, एक ही पीडि़त को दो बार कैसे अदा हो सकता है. लेकिन तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि ऐसा ही हो रहा है. इसके पीछे भी चुनाव का ही दोष मढ़ दिया जाए. अब सवाल ये है कि आखिर आम जनता का असल हमदर्द कौन है नेता या चुनाव... यहां बाजी तो चुनाव के हाथ लग जाएगी. ऐसा नहीं है कि दोनों नेत्रियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आम जनता का काम नहीं किया है. दोनों हमेशा सक्रिय रहीं, अपने-अपने लोगों से इनका मिलना- जुलना जारी रहता है. मौका-बे मौका भी जनता की दहलीज को इनके चरणों का स्पर्श मिलता रहा. सार्वजनिक कार्यक्रमों में इनकी शिरकत भी होती रही. लेकिन सवाल तो विधायक के खाते में ही आएंगे कि उनका इन पांच सालों में जनता के बीच क्या रोल रहा है. इसका जवाब भी खुद जनता के पास है. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह की पत्नी भाजना नेत्री रागिनी सिंह ने भी झरिया में सक्रिय राजनीति को नया चेहरा दिया है. संजीव सिंह के जेल में रहने के बाद भी रागिनी ने सिंह मैंशन के सियासी वृक्ष को मेहनत कर सींचने का काम किया. हालांकि पिछला चुनाव वे हार गईं थीं,  लेकिन इस बार फिर नई ताकत-ऊर्जा के साथ ताल ठोंकने का इरादा है. बीते कुछ सालों में झरिया की धरा पर रागिनी सिंह की मेहनत से उपजी फसल की जड़ों की मजबूती फिर से बहुत जल्द ही आंकी जाएगी. दूसरी तरफ पूर्णिमा सिंह ने सत्ता में रहते हुए आम जनता के लिए कितना और क्या-क्या किया है, इसका प्रतिफल भी जल्द ही सामने आ जाएगा. खैर ये सब तो बाद की बातें हैं. फिलहाल जब तक चुनाव संपन्न नहीं हो जाता है, तब तक तो झरिया की जनता को नेताओं से ऐसी सहानुभूति मिलती रहने की गारंटी है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-iron-thief-gang-busted-in-mahuda-five-arrested-ii-including-2-news/">धनबाद

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