Niraj Kumar Dhanbad : धनबाद (
Dhanbad) भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव की अग्नि परीक्षा से गुजरने की रणनीति बनाने में व्यस्त है. हालांकि धनबाद भाजपा में बनती धुरियां उनकी अग्निपरीक्षा को चुनौतीपूर्ण बनाने में जुटी हुई जान पड़ती हैं. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में धनबाद सीट फसाद की जड़ बन गई है. उम्र सहित अन्य वजहों से इस सीट पर वर्तमान सांसद पशुपतिनाथ सिंह की दावेदारी कमजोर पड़ रही है. बावजूद 74 वर्षीय सासद ने सीट पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी है. इस कारण वह अघोषित दावेदारों से नाराज़ भी चलते दिख रहे हैं. अन्य दावेदारों की वजह से पार्टी में धुरियां बढ़ती जा रही हैं. इन्हीं रणनीतियों के बीच होली के दिन विधायक राज सिन्हा सांसद के घर पहुंचे, रंग लगाया और आशीर्वाद लिया.
विधायक के होली मिलन में नहीं पहुंचे सांसद
कहा जा रहा है कि विधायक राज सिन्हा इस बार धनबाद संसदीय सीट पर दावेदारों की लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए उन्होंने होली मिलन समारोह के बहाने निरसा से बोकारो और टुंडी से सिंदरी तक के कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश की. लेकिन विधायक के कार्यक्रम से सांसद पशुपतिनाथ सिंह व एक अन्य दावेदार पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने दूरी बनाए रखी.
गुड बुक के नेताओं के साथ खूब झूमे सांसद
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alt="" width="300" height="199" /> जोड़ा फाटक में झाल बजाते सांसद पीएन सिंह[/caption] दूसरी ओर जोड़ाफाटक में भाजयुमो प्रदेश मंत्री रूपेश सिन्हा, जियलगोड़ा में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य रागिनी सिंह व निरसा विधायक के नेतृत्व में होली मिलन और बोकारो में भी इसी अवसर पर सांसद पशुपति नाथ सिंह पहुंचे और खुद झाल बजाकर समर्थकों के साथ देर तक झूमते रहे.
एक- दूसरे के कार्यक्रम में जाने से परहेज
24 फरवरी को जिला कार्यालय में बूथ सशक्तीकरण की बैठक में सांसद पहुंचे थे, हालांकि इस बैठक से विधायक ने दूरी बना ली. 5 मार्च को टाउन हॉल के पास विवाह भवन में विधानसभा स्तरीय बूथ सशक्तीकरण की बैठक में विधायक तो पहुंचे, मगर सांसद गायब रहे.
वरीय नेता भी इस गुटबाजी से परेशान
धनबाद भाजपा में बढ़ती इस गुटबाजी से कई कार्यकर्ता व नेता भी परेशान हैं. भाजपा के एक वरीय नेता ने 24 फरवरी को बूथ सशक्तीकरण की बैठक में खुले तौर पर इस गुटबाजी को स्वीकार भी किया था. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गुटबाजी का अंत नहीं हुआ तो वर्ष 2024 का चुनाव आसान नहीं होगा.
कार्यकर्ताओं के लिए बढ़ी परेशानी
धनबाद भाजपा की गुटबाजी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए भी गले की फ़ांस बन गई है. सांसद, विधायक व मेयर के गुट में बंटे कार्यकर्ता परेशान हैं. आम चर्चा में सभी इन गुटीय कार्यकर्ताओं के नाम उंगलियों पर गिनाते हैं. इसके अलावा विधानसभा सीट के लिए भी कई वरीय व अन्य दल से भाजपा में शामिल नेताओं के गुट भी अलग से सक्रिय हैं.
पार्टी युद्धस्तर पर कर रही तैयारी
इन सब के उलट भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लगातार बैठकों और कार्यक्रमों के जरिये वर्ष 2024 के चुनाव को साधने की कोशिशों में जुटा हुआ है. पिछले एक माह में देवघर व धनबाद में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक, बूथ सशक्तीकरण की कई बैठकों, टुंडी में किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति बैठक आदि कई अवसरों पर नेतृत्व की बेचैनी दिख चुकी है. भाजपा का संदेश आम जनता व कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए कई वरीय नेता, प्रवक्ता और दूसरे जिले के विधायक बजट व अन्य बहाने धनबाद जिले का दौरा कर रहे हैं. लेकिन यदि गुटबाजी पर लगाम नहीं कसी गई तो चुनाव की वैतरणी पार करना बहुता आसान नहीं होगा. [wpse_comments_template]
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