नगर निगम का टेंडर फाइनल के करीब, रेलवे को मालिकाना खोने की आशंका
Mithilesh Kumar Dhanbad: रेलवे का तालाब लगता है कमीशनखोरी का नया अखाड़ा बननेवाला है. क्योंकि बगैर मालिकाना हक के टेंडर व ठेका का खेल शुरू हो गया है. तालाब में मत्स्य पालन की योजना हो या सौंदर्यीकरण की, कोई स्पष्ट नीति व कामकाज में पारदर्शिता तो होनी ही चाहिए. खास कर जब कंपनी या संस्थान सरकारी हो तो मिल्कियत का सवाल सबसे पहले सामने आ जाता है. रेलवे का लोको टैंक तालाब किसका है, इस सवाल का जवाब उसके नाम में ही जुड़ा है. तब फिर नगर निगम की ओर से टेंडर क्यों निकाला जा रहा है. इस सवाल के जवाब में कहा जाता है कि रेलवे ने नगर निगम को तालाब के सौंदर्यीकरण की जिम्मेवारी सौंपी है. कैसे कारगर होगी दो विभागों के बीच फंसी योजना
मगर मामले की तह तक जाएं तो पता चलता है कि हीरापुर स्थित वाच एंड वार्ड कॉलोनी स्थित रेलवे के लोको टैंक तालाब तालाब की मिल्कियत अब तक निगम को सौंपी ही नहीं गई है. बावजूद अमृत योजना फेस टू के तहत इसके डेवलपमेंट के लिए 13.16 करोड़ रुपये की निविदा निकाली गई. अगस्त महीने में निविदा के फाइनल होने के दावे भी किए जा रहे हैं. इधर तालाब की हालत भी खस्ता है. एक हिस्सा तो पानी से भरा पड़ा है. मगर दूसरे हिस्से में जलकुंभी का ढेर है. तालाब अतिक्रमण का भी शिकार है. फिलहाल इस तालाब का उपयोग मछली पालन, श्राद्धकर्म और शराबियों के अड्डे के रूप में हो रहा है. सौंदर्यीकरण की योजना बनी तो है, लेकिन दो विभागों के बीच यह योजना कितनी कारगर होगी, इसमें संदेह होता है. तालाब रेलवे के अधीन है, लेकिन कायाकल्प नगर निगम करना चाहता है. बिना करार के टेंडर भी निकाल दिया गया. पिछले सात माह से टेंडर की फाइल नगर विकास व आवास विभाग में धूल फांक रही है. अब इस हालत में तालाब की सुंदरता के पहले ही बदसूरत तौर-तरीके संदेह तो पैदा करेंगे ही. 15 शर्तो पर भी नहीं बनी बात
रेलवे के अधिकारियों को अंदेशा है कि तालाब का जीर्णोद्धार करने के बाद कहीं निगम इस पर अपना अधिकार न जता दे. इस संदेह के कारण ही रेलवे अधिकारियों ने निगम के समक्ष 15 शर्ते रख दी हैं. इन शर्तों की फेहरिस्त फरवरी में ही निगम को भेज दी गई थी. परंतु निगम के अधिकारी इन शर्तों के साथ काम करने के लिए तैयार नहीं है. निगम के अधिकारी रेलवे से तालाब से संबंधित कागजात उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. यह मांग अभी पूरी नहीं हुई है. तालाब के दो मालिक, दो योजनाएं
एक तरफ बिना करार के निगम में टेंडर की प्रक्रिया चल रही है. अगस्त में टेंडर फाइनल होने की बात भी कही जा रही है. इधर रेलवे ने मिल्कियत में एक और पेच लगाते हुए तालाब में मछली पालन के लिए टेंडर भी निकाल दिया है. टेंडर दो, मालिक भी दो, है न नाइंसाफी की बात. रेलवे के अधिकारियों का तर्क है कि मछली पालन व सौंदर्यीकरण दो अलग-अलग मामला है. दोनों को एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं. निगम के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे पांच साल के लिए टेंडर करने जा रहा है. अब सौंदर्यीकरण योजना के तहत तालाब के गाद की सफाई कैसे होगी. इसीलिए रेलवे को टेंडर रद्द करना चाहिए. अमृत योजना की राशि से होना है काम
22 एकड़ में फैले लोको टैंक तालाब का सौंदर्यीकरण अमृत योजना फेज टू की 13.16 करोड़ की राशि से पूरा होना है. इसके लिए निगम ने जनवरी में टेंडर निकाला था. इस राशि से तालाब के चारों ओर घाट निर्माण, गंदे पानी की सफाई के लिए एसटीपी मशीन, तालाब के खाली स्थान में पार्क और ग्रीन पैच का निर्माण होना है. लाइटिंग, फव्वारा तथा बैठने की व्यवस्था भी होनी है. प्रवेश के लिए टिकट की भी व्यवस्था रहेगी. पहले भी हो चुकी है मालिकाना हक की लड़ाई
धनबाद में तालाब के मालिकाना हक की लड़ाई पहले भी हो चुकी है. बेकारबांध तालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान जिला परिषद और निगम कर्मियों के बीच जमकर लात घूसे चले थे. इसके बाद कई महीनों तक काम बंद रहा. बाद में दोनों पक्षों के बीच सिर्फ सौंदर्यीकरण की बात पर सहमति बनी. परंतु काम पूरा होते ही निगम ने तालाब पर कब्जा जमा लिया. जिला परिषद ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामला अभी अदालत में है. यही वजह है कि रेलवे के अधिकारी लोको टैंक को लेकर फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं. सौंदर्यीकरण में रेलवे डाल रहा अड़चन: प्रकाश कुमार
सहायक नगर आयुक्त प्रकाश कुमार कहते हैं कि लोको टैंक तालाब के सौंदर्यीकरण का टेंडर तो अब फाइनल होने वाला है. परंतु अड़चन रेलवे की ओर से ही डाली जा रही है. वहां मछली पालन का काम शुरू कराया जा रहा है. इसे रोकने के लिए पत्राचार किया गया है. रेलवे की ओर से जवाब आया है या नहीं, यह बात संज्ञान में नहीं आई है. निगम से अब तक नहीं हुआ एग्रीमेंट: सीनियर डीसीएम
धनबाद के सीनियर डीसीएम अमरेश कुमार का कहना है कि लोको टैंक तालाब रेलवे के अधीन है. निगम की सौंदर्यीकरण की योजना है, लेकिन अब तक एग्रीमेंट नहीं हुआ है. विशेष जानकारी संबंधित अधिकारियों से बात कर ही दी जा सकती है. [wpse_comments_template]
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