सवाल पूछने पर एक ही जवाब-कम अनाज आ रहा है तो करें क्या
Mithilesh Kumar Dhanbad: जिले की जन वितरण प्रणाली की (पीडीएस) दुकानों में खाद्यान वितरण की स्थिति ठीक नहीं है. 1639 दुकानों में हर जगह लोगों के साथ अलग-अलग परेशानी है. कहीं अनाज कम मिल रहा है, तो कहीं समय पर नहीं मिल रहा है. इससे भी बड़ी बात यह है कि कोई भी दुकानदार अनाज की रसीद नहीं देता है. कालाबाजारी का खेल अलग से है. बायोमीट्रिक सिस्टम के बाद भी गरीबों का अनाज अन्य दुकान व होटलों तक पहुंच जा रहा है. यह काम शहर से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में हो रहा है. गरीबों से बायोमीट्रिक मशीन पर अंगुली का निशान लगाकर दुकानदार कम अनाज दे रहे हैं. सवाल पूछने पर जवाब होता है कि अनाज ही कम आ रहा है, हम क्या करें. इधर अनाज अच्छे दाम में दूसरी जगह खपा दिया जाता है. यह खेल लंबे समय से आराम से चल रहा है.लोगों ने सुनाई दर्द की दास्तां
[caption id="attachment_766014" align="aligncenter" width="272"]alt="" width="272" height="181" /> लाल बाबू राउत[/caption] चिरागोडा निवासी लालबाबू राउत ने बताया कि उनके पास लाल कार्ड है. कोर्ट कैंपस स्थित पीडीएस दुकान से अनाज लेता हैं. अभी सिर्फ चावल ही पूरा मिलता है. पिछले छह माह से गेहूं आधा मिल रहा है. पहले 12 किलो मिलता था, अब सिर्फ 6 किलो मिल रहा है. इसके अलावा नमक मिलता है और कुछ नही. [caption id="attachment_766020" align="aligncenter" width="272"]
alt="" width="272" height="181" /> मैनाा देवी[/caption] मैना देवी कहती हैं कि डेढ़ साल से सिर्फ 10 किलो गेहूं मिल रहा है. पहले 20 किलो मिलता था. कम गेहूं के बदले चावल मिलता था. छह माह से वह भी बंद है. मदन प्रसाद की कहानी भी ऐसी ही है. ग्रीन कार्डधारी कतरास निवासी बेलाल अंसारी ने बताया कि उन्हें तो साल में एक बार सिर्फ चावल ही मिलता है. दुकानदार बोलता है कि अनाज ही नहीं आ रहा है तो क्या करें. अंत्योदय कार्डधारी अब्दुल कलाम ने बताया कि चावल ठीक मिलता है,लेकिन दुकानदार वजन कम देता है. गेहूं भी कम मिलता है. चीनी कभी कभी मिलता है. दुकान खोलने का समय सुबह 8 से 2 बजे तक है, लेकिन 11 बजे ही दुकान बंद कर देता है. जिले में कमोबेश सभी जगह यही स्थिति है.
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