के मुस्लिम बहुल इलाकों में पर्व की तैयारी जोरों पर है. इन दिनों सेवइयों की सोंधी खुशबू से गैंग्स की गलियां महक रहीं हैं. पहले इन गलियों में जहां मर्डर खून-खराबे की बू आती थी, आज वही गैंग्स की गलियों की हवा में सेवइयों की खुशबू घुल रही है. गैंग्स की ये गलियां कोई और नहीं, शहर के वासेपुर की हैं. धनबाद के वासेपुर ने भले ही पूरे देश में अपनी पहचान खून-खराबे और मर्डर के लिए बना ली हो, लेकिन गैंग्स की इन गलियों में बन रहीं सेवइयों की मिठास देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता समेत झारखंड के पड़ोसी राज्यों के बड़े शहरों में घुल रही है. इन शहरों में यहां की सेवइयों की डिमांड अधिक है. ईद से पहले दिल्ली, कोलकाता, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में वासेपुर से सेवइयां भेजी जा रही हैं.
250 से 500 रुपए प्रति किलो कीमत
वासेपुर में पिछले 50 वर्षों से मौलवी साहब लच्छा वाले के नाम से प्रसिद्ध दुकान के मालिक मो. अमानुल्लाह बताते हैं कि हमारी दुकान में तीन क्वालिटी की सेवइयां तैयार की जाती हैं. दिल्ली, कोलकाता, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश समेत अन्य शहरों इनकी डिमांड अधिक है. वहां के लोग ईद के मौके पर धनबाद आकर सेवइयों की खरीदारी करते हैं. ईद से एक महीने पहले ही बुकिंग शुरू हो जाती है. उन्होंने बाताया कि दुकान में क्वालिटी के हिसाब से 250 रुपए से लेकर 500 रुपए प्रति किलोग्राम तक की सेवाइयां उपलब्ध हैं. देशी घी की सेवइयां 500 रुपए kg , फॉर्च्यून ऑइल से बनी सेवइयां 300 रुपए kg और डालडा से बनी सेवइयां 250 रुपए kg बिक रही हैं.रमजान महीने में 300 क्विंटल सेवइयों की बिक्री
रमजान के महीने में वासेपुर की गलियों में सेवइयों की करीब दो दर्जन छोटी-बड़ी दुकानें सजी हैं. इनमें 7-8 बड़ी दुकानें है. इनमें प्रत्येक दुकान में पूरे रमजान में 40 से 50 क्विंटल तक सेवइयों की बिक्री होती है. वहीं, छोटी दुकानों की बात करें, तो उनकी बिक्री 3 से 4 क्विंटल है. यानी कुल मिलाकर इस बार ईद पर करीब 300 क्विंटल सेवइयों की बिक्री होने की उम्मीद है.बोकारो से भी सेवइयां खरीदने पहुंच रहे लोग
बोकारो सहित झारखंड के अन्य शहरों में वासेपुर की सेवइयों की डिमांड अच्छी है. पड़ोसी जिला बोकारो से सेवइयां खरीदने वासेपुर पहुंचे मोहम्मद सत्तार ने लागातार रिपोर्टर को बताया कि वे हर साल ईद पर यहीं से सेवइयां खरीकर ले जाते हैं. इन की क्वालिटी के आगे अच्छी-अच्छी कंपनियों की सेवइयां भी फेल हैं. मोहम्मद सत्तार बताते हैं कि वह अपने साथ अपने तीन दोस्तों के लिए भी सेवइयां खरीदने आए हैं.ईद-उल-फितर पर मीठी सेवइयों से मेहमानों का स्वागत
शहर के मो. शकील राणा बताते हैं कि ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद मुस्लिमों का पावन त्योहार है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद मनाई जाती है. हालांकि ईद की डेट चांद को देखकर निश्चित होती है. इस साल ईद 3 मई को मनाई जाएगी. ईद-उल-फितर के अवसर पर खासतौर से मीठे पकवान बनते हैं. इस दिन का मुख्य पकवान मीठी सेवइयां हैं जो घर आए मेहमानों को खिलाई जाती हैं. दोस्तों और रिश्तेदारों में भी ईदी बांटी जाती है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=299147&action=edit">धनबाद: ईद पर पुख्ता सुरक्षा, अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई [wpse_comments_template]

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