alt="" width="300" height="169" /> स्ट्रेचर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां ले जाते कर्मी[/caption] दरअसल 560 बेड वाले एसएनएमएमसीएच में वर्षो से टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबलों की मरम्मत का काम पिछले एक माह से चल रहा है. अस्पताल के अलग अलग वार्ड और स्टोर रूम में टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबल स्टोर रूम से निकाल कर कार्यस्थल तक पहुंचाने के लिए स्टाफ को स्ट्रेचर से ज्यादा कोई चीज सुविधाजनक नहीं लगती. स्ट्रेचर पर टूटे टेबल, बेड व प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां लादते हैं और झटपट काम वाली जगह पर पहुंचा देते हैं. परंतु मरीज को स्ट्रेचर की जरूरत पड़ी तो उन्हें परेशानी के साथ इंतजार करना पड़ता है. वैसे भी अस्पताल में मरीजों के लिए कई सुविधाओं का घोर अभाव है. उनका कहना है कि अस्पताल में यदि किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड कराना हो तो कभी स्ट्रेचर नहीं है तो कभी वार्ड बॉय नदारद है. दोनों में से कोई एक चीज प्रायः गायब मिलती है. एक भुक्तभोगी ने बताया कि 2 दिन पूर्व ही उन्हें पुत्र के सीने का एक्सरे कराने के लिए लगभग डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा. इस मामले में शुभम संदेश की ओर से अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन विफलता ही हाथ लगी. [wpse_comments_template]
धनबाद: एसएनएमएमसीएच में स्ट्रेचर पर मरीज नहीं, ढोये जाते हैं टूटे टेबल व बेड
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ( एसएनएमएमसीएच ) में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने के काम में आने वाले स्ट्रेचर पर सामान की ढुलाई हो रही है. इधर मरीजों को वार्ड में शिफ्ट होने के लिए घंटों स्ट्रेचर का इंतजार करना पड़ता है. टूटे चेयर, टेबल, प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां ढोने के समय स्ट्रेचर आसानी से मिल जाता है. [caption id="attachment_631674" align="aligncenter" width="300"]
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alt="" width="300" height="169" /> स्ट्रेचर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां ले जाते कर्मी[/caption] दरअसल 560 बेड वाले एसएनएमएमसीएच में वर्षो से टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबलों की मरम्मत का काम पिछले एक माह से चल रहा है. अस्पताल के अलग अलग वार्ड और स्टोर रूम में टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबल स्टोर रूम से निकाल कर कार्यस्थल तक पहुंचाने के लिए स्टाफ को स्ट्रेचर से ज्यादा कोई चीज सुविधाजनक नहीं लगती. स्ट्रेचर पर टूटे टेबल, बेड व प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां लादते हैं और झटपट काम वाली जगह पर पहुंचा देते हैं. परंतु मरीज को स्ट्रेचर की जरूरत पड़ी तो उन्हें परेशानी के साथ इंतजार करना पड़ता है. वैसे भी अस्पताल में मरीजों के लिए कई सुविधाओं का घोर अभाव है. उनका कहना है कि अस्पताल में यदि किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड कराना हो तो कभी स्ट्रेचर नहीं है तो कभी वार्ड बॉय नदारद है. दोनों में से कोई एक चीज प्रायः गायब मिलती है. एक भुक्तभोगी ने बताया कि 2 दिन पूर्व ही उन्हें पुत्र के सीने का एक्सरे कराने के लिए लगभग डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा. इस मामले में शुभम संदेश की ओर से अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन विफलता ही हाथ लगी. [wpse_comments_template]
alt="" width="300" height="169" /> स्ट्रेचर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां ले जाते कर्मी[/caption] दरअसल 560 बेड वाले एसएनएमएमसीएच में वर्षो से टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबलों की मरम्मत का काम पिछले एक माह से चल रहा है. अस्पताल के अलग अलग वार्ड और स्टोर रूम में टूटे पड़े बेड, चेयर व लोहे के टेबल स्टोर रूम से निकाल कर कार्यस्थल तक पहुंचाने के लिए स्टाफ को स्ट्रेचर से ज्यादा कोई चीज सुविधाजनक नहीं लगती. स्ट्रेचर पर टूटे टेबल, बेड व प्लास्टर ऑफ पेरिस की बोरियां लादते हैं और झटपट काम वाली जगह पर पहुंचा देते हैं. परंतु मरीज को स्ट्रेचर की जरूरत पड़ी तो उन्हें परेशानी के साथ इंतजार करना पड़ता है. वैसे भी अस्पताल में मरीजों के लिए कई सुविधाओं का घोर अभाव है. उनका कहना है कि अस्पताल में यदि किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड कराना हो तो कभी स्ट्रेचर नहीं है तो कभी वार्ड बॉय नदारद है. दोनों में से कोई एक चीज प्रायः गायब मिलती है. एक भुक्तभोगी ने बताया कि 2 दिन पूर्व ही उन्हें पुत्र के सीने का एक्सरे कराने के लिए लगभग डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा. इस मामले में शुभम संदेश की ओर से अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन विफलता ही हाथ लगी. [wpse_comments_template]

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