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धनबाद : सिपाही विद्रोह से पहले हुई थी तोपचांची दुर्गा मंदिर की स्थापना

 

मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्र पर हिंदू के साथ सिख व मुसलमान मिलकर करते हैं पूजा

Akshaya kumar choubey Topchanchi (Dhanbad) : तोपचांची दुर्गा मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. इस मंदिर की स्थापना 1857 के सिपाही विद्रोह से हुई थी. तब मां की प्रतिमा की स्थापना रामधन पाल ने की थी. बाद में कतरासगढ़ के राजा पूर्णेंदु नारायण सिंह व रामधन पाल के संयुक्त प्रयास से यहां दुर्गा व काली मंदिर का निर्माण कराया गया. राजा प्रथा समाप्त होने के बाद रामधन पाल के वंशजों ने मंदिर को सोलह आना को सौंप दिया. अब इसे सोलह आना सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के नाम से जाना जाता है. मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्र पर माता रानी की भव्य मूर्ति स्थापित कर हिंदू, सिख व मुस्लिम समाज के लोग मिल-जुल कर पूजा करते हैं. यहां सार्वजनिक दुर्गा पूजा का इतिहास 200 साल पुराना है. इस वर्ष भी मंदिर में भव्य प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही है. ग्रामीणों ने वर्ष 1990 में इस पौराणिक मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू किया और 1995 में यह भव्य मंदिर तैयार हुआ. सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा के साथ मां काली की प्रतिमा विराजमान है. मंदिर में अष्टमी व नवमी को धनबाद सहित बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग व अन्य जिलों के श्रद्धालु भतुआ व बकरा की बलि देने आते हैं. यहां बांग्ला रीति-रिवाज से पूजा की जाती है.

मंदिर का दोबारा जीर्णोद्धार शुरू, 101 फीट होगी उंचाई

मंदिर कमेटी के सदस्य अशोक दास ने बताया  इस साल से मंदिर का दोबारा जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया है. मंदिर की उंचाई बढ़ाकर 101 फीट करने का लक्ष्य है. जीर्णोद्धार कार्य अगले वर्ष तक पूरा होने का अनुमान है. मंदिर का स्वरूप बिहार के लखीसराय स्थित मंदिर जैसा दिया जा रहा है. उंचाई 101 फीट होने से यह इलाके का सबसे  ऊंचा मंदिर होगा. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-worship-of-mother-goddess-after-entry-of-navpatrika-in-temples-and-pandals/">धनबाद

: मंदिरों-पंडालों में नवपत्रिका प्रवेश के बाद मां की आराधना
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