Dhanbad : धनबाद जिले की स्थापना के 24 अक्टूबर को 66 वर्ष पूरे हो गए. लेकिन यह न तो प्रशासन को याद रहा, न ही राजनीतिक दलों को. किसी ने स्थापना दिवस तक नहीं मनाया. दरअसल, 24 अक्टूबर को दीपावली की छुट्टी होने के कारण जिले के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहे. प्रशासनिक अधिकारी भी छुट्टी में मशगूल रहे. ज्ञात हो कि आधिकारिक रूप से धनबाद जिले की स्थापना 24 अक्टूबर 1956 को हुई थी. पुरुलिया के मानभूम जिले से अलग कर धनबाद जिले का गठन किया गया था. हालांकि इससे करीब 100 वर्ष पहले वर्ष 1852 में पहली बार जिले ने आकार लेना शुरू किया था. तब गोविंदपुर की बागसुमा पंचायत में अंग्रेजी सरकार की ओर से अनुमंडल का गठन किया गया था. इसके बाद जिले को आकार लेने में वर्षों लग गए. इसे भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-classes-of-newly-enrolled-students-in-iit-ism-start-from-31/">धनबाद
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कोयले की खोज ने जिले को दी पहचान
वर्ष 1819 में लेफ्टिनेंट नॉरिंटन ने झरिया क्षेत्र की सर्वे रिपोर्ट जारी की थी. इसमें बताया था कि यहां की धरती के गर्भ में प्रचुर मात्रा में प्रचुर मात्रा में अच्छी क्वालिटी के कोयले (कोकिंग कोल) का भंडार है. वर्ष 1866 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद 1890 में ईस्ट इंडियन रेलवे ने कोयला खनन और ट्रांसपोर्टिंग के लिए रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू किया. 20 मई 1894 को धनबाद से पहली बार ट्रेन चली. तब अंग्रेजी शासन ने स्टेशन के आसपास पत्थलकोठी और चर्च का निर्माण कराया था. यहीं से धनबाद जिले के वर्तमान स्वरूप की नींव पड़ी. वर्तमान में यह झारखंड के प्रमुश शहरों में शुमार है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-crores-bet-in-gambling-on-deepawali-police-kept-driving-away-the-gamblers/">धनबाद: दीपावली पर जुए में लगा करोड़ों का दांव, जुआरियों को खदेड़ती रही पुलिस [wpse_comments_template]
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