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धनबाद:  नगर निगम में जब भी होता है टेंडर, आम आदमी करता है सफर

कभी हंगामा व धांधली तो कभी उसे रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था करती है परेशान

Dhanbad : धनबाद नगर निगम में जब भी टेंडर डाला जाता है, आम आदमी सफर करता है.  कभी दबंगों की धमाचौकड़ी से काम बाधित होता है तो कभी उसे रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था आम आदमी का रास्ता रोक देती है. हालत यह कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना हो, होल्डिंग टैक्स का मामला हो या फिर पानी-सफाई की शिकायत हो, सारे काम ठप पड़ जाते हैं. पूरे नगर निगम में टेंडर का खेल व ठेकेदारों की धांधली देखी जाती है. गुरुवार 21 सितंबर को भी यही हुआ. हालांकि उस दिन टेंडर डालने में हंगामा व धांधली रोकने के लिए नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला बंद करना पड़ा था. इस तालाबंदी से टेंडर तो बगैर किसी झमेले के डाल दिये गए, परंतु अन्य सारा कामकाज ठप पड़ गया. इसके पहले पिछले दिन हंगामा, मारपीट व छीनाझपटी के बीच टेंडर डालने के समय भी आम आदमी का काम नहीं हो सका था.

 पूरे राज्य में टेंडर ऑनलाइन, तो यहां क्यों नहीं

धांधली व हंगामा से बचने के लिए पूरे राज्य के नगर निगम में ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया चालू है.  परंतु धनबाद में अब तक पुरानी परंपरा के तहत हार्ड कॉपी जमा करने की बाध्यता कायम है. हालांकि सरकार ने विगत एक मार्च से ही हार्ड कॉपी जमा करने की बाध्यता समाप्त कर ऑनलाइन टेंडर जमा करने का नियम बना दिया है. हार्ड कॉपी जमा करने में ही पेपर छीनने की घटना होती है. दबंग ठेकेदारों के गुर्गे डराते-धमकाते हैं और अप्रिय स्थिति पैदा हो जाती है. सरकार के संयुक्त सचिव रंजीत रंजन प्रसाद ने सभी सरकारी विभागों के चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर एक मार्च से टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन पूरा करने का निर्देश दिया था.

 निगम छोड़कर सभी विभाग थाने में जमा कराते हैं पेपर 

इसके अलावा शहर में भवन प्रमंडल, पथ निर्माण जैसे सरकारी विभाग थाने में पेपर जमा करने की सुविधा देते हैं. लेकिन नगर निगम गठन के 13 साल बाद भी यह सुविधा निगम में शुरू नहीं हो सकी है. निगम के इंजीनियरिंग विभाग के इंजीनियर भी नहीं चाहते हैं कि टेंडर पेपर थाने में जमा हो. इंजीनियरिंग विभाग की मिलीभगत से वर्षों से टेंडर मैनेज का खेल चल रहा है. [wpse_comments_template]

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