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धनबाद : बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य व भरपेट भोजन मिले तभी होंगे आत्मनिर्भर:  डॉ काशी नाथ चटर्जी

 
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) विज्ञान समिति झारखंड, अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से दो दिवसीय सेमिनार का समापन 7 जनवरी शनिवार को हुआ. सेमिनार में अन्य राज्यो से दर्जनों कृषि वैज्ञानिक शामिल हुए. समापन से पूर्व ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड के कृषि डेस्क के विस्तारित सेमिनार के दूसरे सत्र में आत्मनिर्भर भारत की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की गई, जिसमे प्रो. डॉ दिनेश एब्रॉल, प्रो अंशुमान दास,  प्रो. पार्थिव बासु शामिल थे. झारखंड के कृषि वैज्ञानिक प्रो. अंशुमन दास ने कहा कि भारत में 90 % खेती वर्षा आधारित खेती है. यहां के किसानों को अब बीज के लिए भी आत्मनिर्भर बनना होगा. साथ ही धान, बकरी, मुर्गा, मछली पालन आदि पर ज़ोर देने से ही आत्मनिर्भर बन सकते हैं. डॉ काशी नाथ चटर्जी ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य,भोजन ( कृषि ) में कमी आई है.  मूल्यांकन करने की आवश्यकता है. सभी को बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ, भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है. इसी कारण आज आत्मनिर्भर भारत पर चिंतन किया जा रहा है. मनरेगा के तहत कुआं,  तालाब के माध्यम से झारखंड के कुछ जगहों में सिंचाई हो रही है ,जिसे और बेहतर करने की आवश्यकता है. सेमिनार में सिंफर धनबाद के पूर्व निदेशक डॉ अमलेंदु सिन्हा, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय महासचि डॉ. काशी चटर्जीनाथ, कृषि वैज्ञानिक प्रो. अंशुमान दास,  प्रगतिशील आंदोलन के नेतृत्वकारी प्रो गोपीनाथ बक्शी, सीएमआरआई धनबाद के वैज्ञानिक प्रो राजशेखर सिंह, आईएसएम धनबाद के प्रो अपर्णा कृष्ण, कृषि वैज्ञानिक धर्मेंद्र मिश्रा,  डिपार्टमेंट ऑफ जुलोजी एंड पॉलिनेशन स्टडीज कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो पार्थिव बासु, सुप्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक व भारत में विज्ञान आंदोलन के संस्थापक प्रोडॉ. दिनेश एब्रोल,   अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के राष्ट्रीय महासचिव आशा मिश्रा मौजूद थे. [wpse_comments_template]
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