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बाघमारा बस्ती के वैष्णवी मंदिर में 200 सालों से वैष्णवी पद्धति से हो रही मां काली की पूजा

  • दो सौ साल पुरानी परंपरा
  • बाघमारा बस्ती के वैष्णवी काली मंदिर में वैष्णवी पद्धति से होती है मां काली की पूजा
  • काली पूजा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
  • अन्य मंदिरों में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

Dhanbad :  कोयलांचल के बाघमारा बस्ती स्थित श्रीश्री वैष्णवी काली मंदिर में करीब 200 सालों से वैष्णवी पद्धति से मां काली की पूजा हो रही है. काली पूजा के अवसर पर यहां भक्तों का जनसैलाब उमड़ा. इसके अलावा अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. 

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मंदिर के सेवायत पुजारी मुरलीधर पांडेय और सरजु पांडेय ने बताया कि लगभग दो सौ वर्ष पूर्व ढेला पेड़ के नीचे मां काली की आराधना शुरू हुई थी. बाद में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था को देखते हुए पत्थर की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर का निर्माण किया गया.

यहां पहले बली प्रथा प्रचलित थी. लेकिन नंदलाल बाबा उर्फ ब्रह्मचारी बाबा के प्रयास से वैष्णवी पद्धति अपनाई गई और बली प्रथा को समाप्त कर दिया गया. उन्होंने बताया कि मां काली के दरबार में सच्ची श्रद्धा से आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.

वर्ष 2007 में तत्कालीन बाघमारा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रभाकर सिंह भी मनोकामना लेकर मां के दरबार में पहुंचे थे, जिसके पूरा होने के बाद उनके प्रयास से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया.

समिति सदस्य दीपक प्रसाद ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर परिसर में आठ दिनों तक चलने वाले मेले का आयोजन किया गया है. मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. समिति द्वारा सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं.

प्रशासन और पुलिस का भी पूर्ण सहयोग मिल रहा है. उन्होंने कहा कि मां काली का यह मंदिर आज पूरे क्षेत्र में आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाकर जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

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