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धनबाद : माता-पिता के गलत संस्कार बच्चों को प्रभावित करते हैं : विजय कौशल जी

 
Nirsa : राम कथा सुनने से व्यक्ति को काम, क्रोध, लोभ, उलझन से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है. अंतर्मन में सद्गुणों का वास होता है. यह उद्गार कथावाचक संतश्री विजय कौशल महाराज ने गोविंदपुर के होटल में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन 2 जनवरी को व्यक्त किये. कथा का आयोजन सेठ हरदेवराम मिताथलिया ट्रस्ट ने किया है. नारद प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी ने कहा कि माता-पिता के संस्कार में त्रुटियों से संताल गलत राह पकड़ लेती है. आजकल लोग आत्मनिरीक्षण कम और दोषारोपण ज्यादा करते हैं. कामना पूर्ति के लिए सांसारिक क्रिया की तरफ भागते हैं. देव ऋषि नारद पर काम, क्रोध, लोभ का असर नहीं था. भक्त चरित्र की व्याख्या करते हुए महाराज ने बताया कि भक्त कभी इच्छा व्यक्त नही करता, वो सब अपने आराध्य पर छोड़ देता है. संसार में जो कुछ भी होता है, प्रभु की कृपा से होता है और भक्त उसे उसी स्वरूप में प्रभु का प्रसाद मानकर ग्रहण करता है. गृहस्थ अनुशासन की चर्चा करते हुए कहा कि एक आयु के बाद बच्चों को निर्णय लेने का अधिकार देना चाहिए और स्वयं को सलाहकार की भूमिका में रहें. इससे गृहस्थ आनंद का रस गाढ़ा होता है. इससे पूर्व मुख्य यजमान शंभूनाथ अग्रवाल ने पत्नी उर्मिला देवी, संतान नंदलाल अग्रवाल, बलराम अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, पायल अग्रवाल, सुभद्रा व श्याम केजरीवाल के साथ व्यासपीठ की पूजा की. कथा में भाजपा नेता रवींद्र राय, विजय झा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-mass-marriage-of-121-couples-to-be-held-on-15th-in-golf-ground-90-got-registered/">धनबाद

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