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नहीं पड़ा मंदा, जाली नोटों का धंधा

Shyam Kishore Choubey चाईबासा (झारखंड) की एक अदालत ने इसी 11 अगस्त को मलाया हेम्ब्रम को चार साल की जेल और पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई. मलाया पर जाली नोट (फेक इंडियन करंसी) चलाने का आरोप था. मलाया चाईबासा के पूर्व विधायक पुत्कर हेंब्रम की पत्नी हैं. पुत्कर ने दो शादियां की थी. मलाया दूसरी वाली पत्नी है. मतकमहातु गांव निवासी जयन्ती हेम्ब्रम ने मलाया के विरुद्ध दो हजार का नकली नोट चलाने का मामला 11 सितंबर 2020 को मुफ्फसिल थाने में दर्ज कराया था. उसका कहना था कि मलाया ने उसकी दुकान से 1,600 रुपये का सामान खरीदकर उसे दो हजार का एक नोट दिया था. जयन्ती जब यह नोट जमा कराने गई तो एटीएम ने उसे स्वीकार नहीं किया. शिकायत के अनुसार, जयन्ती ने वापस जाकर वह नोट गांव के लोगों को दिखाया तो पता चला कि वह नकली है. तत्काल बाद उसने नकली नोट देने की शिकायत मलाया से की तो उसने चाकू से हमला कर दिया. मौका-ए-वारदात से गुजर रहे पुलिस गश्ती दल ने जाली नोट के साथ मलाया को पकड़ लिया. पुलिस की जांच में मलाया ने बताया था कि वह दो हजार के नकली नोट दिल्ली से 500 रुपये में लाकर यहां चलाती है. ऐसी ही एक सूचना पर झारखंड की राजधानी रांची के निकट पिठौरिया गांव के पिरूटोला में दिल्ली पुलिस ने 13 अगस्त को तसव्वुर अंसारी को 3.97 लाख रुपये मूल्य के नकली नोटों के साथ पकड़ा. इसके पहले 28 जून को पुलिस ने रांची के ही निकट रातू में पांच लाख तीन हजार रुपये मूल्य के जाली नोटों संग चतरा निवासी मोहम्मद सोहराब को पकड़ा था. वह इस फेक करंसी से खूंटी में अफीम की खरीदारी करने जा रहा था. है न दिलचस्प बात! जाली नोट से प्रतिबंधित ड्रग की खरीदारी. मीडिया में यह बात भी आई थी कि 6 मई को ईडी ने रांची में एक सीनियर आईएएस अधिकारी और उनके सीए के हवाले से बेहिसाबी 19 करोड़ कैश जब्त किया था, जिसमें कुछ लाख फेक करंसी भी थी. उससे भी पहले 2021 की पहली फरवरी को सिमडेगा पुलिस ने 3,21,900 रुपये मूल्य के 100, 200 और 500 की जाली करंसी के साथ प्रदीप मांझी, पंकज बड़़ाईक, अमित यादव और लोक सिंह को बोलबा थाना क्षेत्र में पकड़ा था. यह ओड़िशा का सीमावर्ती क्षेत्र है. फेक करंसी के चलन की अनेक घटनाएं आये दिन प्रकाश में आती रहती हैं. फेक करंसी के कारण बाजार गड़बड़ा जाता है, जीडीपी पर अंतर पड़ता है और बाजार में जिसके हाथ यह लगता है, उसका वर्तमान और भविष्य कानून के शिकंजे में फंसता है. हालांकि फेक करंसी का चलन बहुत पुराना है, लेकिन हमें यह याद करना ही होगा कि 8 नंवबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने बहुत हौसले से नोटबंदी करते हुए हजार और पांच सौ के नोटों को प्रतिबंधित कर दिया था. अचानक की इस ऐतिहासिक कार्रवाई में उन्होंने बहुत गर्व से ऐलान किया था कि नोटबंदी से एक तो काला धन बाहर आ जाएगा, दूसरे फेक करंसी का चलन बंद हो जाएगा. गुजरे पांच-छह वर्षों में हुआ क्या? एक तो नोटबंदी के बाद जारी किये गये 2000 के नोट ढूंढे नहीं मिलते, दूसरे आये दिन जाली नोटों की कहानी सामने आती रहती है. नियामक संस्था रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट (2021-22) बताती है कि उसके पहले के वित्तीय वर्ष के सापेक्ष 55 फीसद अधिक 2000 के जाली नोट पकड़ में आये. ये वे नोट हैं, जो बैंकों में मिले. 2021-22 में 2000 रुपये मूल्य के 13,604 और 500 रुपये मूल्य के 79,669 जाली नोट मिले. उस वर्ष कुल 2,30,971 फेक करेंसी पकड़ी गई थी. रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर में पकड़ में आयी फेक करंसी का अनुपात इस प्रकार बताया गया है, आरबीआई में 6.9 प्रतिशत और अन्य बैंकों में 93.1 प्रतिशत. कभी-कभार एटीएम से जाली नोट मिलने की खबरें तस्दीक करती हैं कि तमाम सावधानियों के बावजूद बैंकों तक भी जाली नोट पहुंच ही जाते हैं. नवंबर 2016 में जिस हौसले से नोटबंदी लागू की गई थी, जिसमें करोड़ों लोगों को अनेक तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था, सरकार को अब उसी हौसले से ऐसा मैकेनिज्म बहाल करना चाहिए, ताकि जाली नोटों का चलन बढ़ा रहे असामाजिक तत्वों का हौसला पस्त हो जाए. बेशक, काले धंधेबाज उन पर लगाम लगाने वाले हर उस कदम की काट खोज लेते हैं, लेकिन सच यह भी है कि सरकार जैसी संस्था के हाथ बड़े लंबे होते हैं और वह फुलप्रूफ कार्रवाई भी कर सकती है. मोदी जैसे प्रशासक के लिए देश में जाली नोटों का चलन बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि हम चकित भाव से देख रहे हैं, कोलकाता में एक जून 2018 को सत्तार शेख 2000 रुपये मूल्य के दो सौ नोटों के साथ पकड़ा गया था. जबकि 13 जुलाई 2022 को ओडिशा के संबलपुर जिलांतर्गत नुआ अधापाड़ा गांव में पोदार प्रसाद साहू और जन्मेजय बाघ 15 लाख की फेक करंसी के साथ दबोचा गया. ऐसे ही 4 नवंबर 2017 को मालदा जिलांतर्गत बांग्लादेश सीमा पर 3.96 लाख रुपये मूल्य के 2000 के नोटों संग असीकुल शेख बीएसएफ की पकड़ में आया और मुंबई के सहार क्षेत्र में 2 फरवरी 2020 को 23.86 लाख रुपये मूल्य के 2000 के 1193 नोटों के साथ जावेद गुलामनबी शेख पकड़ा गया था. अपने देश में फेक करंसी बाहर से सप्लाई की जा रही है तो सवाल सीमाओं की चौकसी पर उठता है. डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.

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