Surjit Singh प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने भाषण में राहुल गांधी के मटन बनाने और तेजस्वी यादव के मछली खाने को चुनावी मुद्दा बना दिया. इस मामले को हिंदुत्व से जोड़ दिया. कहा कि नवरात्र में लोग नॉनवेज खाते हैं. खाने से दिक्कत नहीं है. लेकिन वो वीडियो बना कर हिंदुओं को चिढ़ाते हैं. इस पर तेजस्वी यादव का बयान आया कि प्रधानमंत्री जी बेरोजगारी व महंगाई पर बोलिए. नॉनवेज खाने की बात करके जनता को गुमराह मत करिए. अब मोदी बोले हैं, तो मुद्दा तो बनना ही था. टीवी चैनलों पर यही बहस का मुद्दा बन गया है. सोशल मीडिया पर यही वायरल है और यूट्यूब चैनलों पर इसी पर चर्चा चल रही है. कोई वाह-वाह कर रहा, कोई इसे बड़ा मुद्दा मान रहा है. कोई इसे लेकर मोदी की आलोचना कर रहा है, तो कुछ लोग मास्टर स्ट्रोक बताने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं. तो क्या यह समझा जाए कि जो नरेंद्र मोदी परिवारवाद, भ्रष्टाचार, राम मंदिर और विश्वगुरु को लेकर चुनावी समर में उतरे थे, उन्हें तेजस्वी यादव ने मछली पर लाकर खड़ा कर दिया. पर जरा रुकिए. जरा सोचिए. यह हाल है हमारे रहनुमा का. हमारी सोच और समझ का. हर बात को धर्म से जोड़ दो. हिंदु त्व पर खतरा बता दो. ऐसा लगता है देश में और कोई मुद्दा बचा ही नहीं. विकराल होती बेरोजगारों की फौज (पिछले हफ्ते रिपोर्ट आयी कि वर्किंग एज ग्रुप के 111 करोड़ में से 83 प्रतिशत यानी 69.50 करोड़ लोग बेरोजगार हैं), राक्षस बन लोगों की जिंदगी तबाह कर रही महंगाई (सीएसडीएस की गुरुवार को ही रिपोर्ट आयी है कि यही देश में बड़ा मुद्दा है), शिक्षा की खराब स्थिति (हमारे युवा काम के योग्य ही नहीं), स्वास्थ्य सेवाओं का आम लोगों की पहुंच से दूर होना जैसी समस्याएं कोई मायने नहीं रखतीं. पूरी दुनिया देख सुन रही है. हमारे यहां चुनाव में मछली खाना सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है. पर यह हो रहा है. सच में दुनिया भर में डंका बज रहा है. [wpse_comments_template]
क्या तेजस्वी ने मोदी को मछली पर ला दिया ?
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