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सीयूजे में 2025 के रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार पर चर्चा सत्र आयोजित

झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के रसायन विज्ञान विभाग में शनिवार को 'रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2025' विषय पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया.
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Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के रसायन विज्ञान विभाग में शनिवार को 'रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2025' विषय पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया. इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोधों और उनके वैश्विक प्रभावों से अवगत कराना था.

 


इस वर्ष रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार गैसों के भंडारण, उत्प्रेरक के रूप में कार्य, बायोमेडिसिन, ऊर्जा उत्सर्जन, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स और स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक संरचना जैसे अत्यंत उन्नत क्षेत्रों में मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) के विकास में अभूतपूर्व योगदान के लिए प्रदान किया गया है.

 


इस अवसर पर विभाग के परास्नातक विद्यार्थियों श्रद्धा सुमन, आलोक राज तथा सुप्रिया कुमारी ने 2025 के नोबेल विजेताओं सुसुमू कितागावा, रिचर्ड रॉबसन एवं ओमर एम याघी के कार्यों पर विस्तृत एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं. विद्यार्थियों ने उनके वैज्ञानिक नवाचारों को सरल भाषा और रोचक तरीकों से समझाया, साथ ही उनके सामाजिक और औद्योगिक महत्व पर भी प्रकाश डाला.

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभागाध्यक्ष एवं डीन, शोध एवं विकास प्रो अरुण कुमार पाढ़ी ने इस नोबेल पुरस्कार को 'बहु-आयामी उपयोगिता वाला खोज' बताया. उन्होंने कहा इस वर्ष का रसायन विज्ञान का नोबेल गैसों के कुशल भंडारण, उत्प्रेरक के रूप में नई संभावनाएं, बायोमेडिसिन में नई दिशा, ऊर्जा उत्सर्जन की चुनौतियों का समाधान, और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक संरचनाओं के निर्माण में क्रांतिकारी कदम है. यह खोज नैनोजेनेरेटरों के माध्यम से मैकेनिकल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है.

 

चर्चा सत्र में विभाग के शिक्षकगण प्रो रतन कुमार डे, डॉ बैरागी चरण मल्लिक, डॉ सोमेन डे, डॉ अरविंद लाल, डॉ रमेश ओरांव, डॉ राज बहादुर और डॉ सिमोन वाटरे संगमा उपस्थित रहे और विद्यार्थियों के साथ शोध, नवाचार और वैज्ञानिक सोच पर प्रेरक संवाद किया.सत्र का समापन विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं के उत्तर देने और उनके भविष्य के शोध दृष्टिकोण को दिशा देने के साथ हुआ. यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणास्पद एवं शोधोन्मुखी सिद्ध हुआ.

 

 

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