Ranchi: सरला बिरला पब्लिक स्कूल (SBPS) रांची के बच्चों ने स्पिकमैके द्वारा आयोजित केरल की प्राचीन युद्ध कला कलारीपयट्टू का प्रदर्शन देखा. इस कला का प्रदर्शन कृष्णदास गुरुक्कल और उनकी टीम के सदस्यों ने किया. कृष्णदास गुरुक्कल केरल के त्रिशूर जिले के चावक्कड़ में कलारीपयट्टू सिखाते हैं. उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस कला से जुड़ा हुआ है. कलारीपयट्टू एक प्राचीन युद्ध कला है जो शरीर और मन, दोनों को मजबूत बनाती है. इसका इतिहास बहुत पुराना है. यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. बच्चों ने इसे बड़ी दिलचस्पी से देखा और भारत की स्वदेशी कला कलारीपयट्टू के प्राचीन इतिहास के बारे में भी जानकारी प्राप्त की. प्राचार्या परमजीत कौर ने बच्चों को बताया कि ऐसी प्राचीन कलाएं हमारे देश की समृद्ध संस्कृति का हिस्सा हैं, जिन्हें हमें सहेजना और याद रखना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कला में डूब जाने से मन, शरीर और आत्मा को एकाग्र करने तथा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है. इसे भी पढ़ें - किरेन">https://lagatar.in/kiren-rijiju-advised-rahul-gandhi-to-improve-congress-objected/">किरेन
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रांची: SBPS में भारतीय धरोहर कलारीपयट्टू का प्रदर्शन
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