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नये हाईकोर्ट भवन में महज 200 चैंबर्स से नाराजगी, आंदोलन के मूड में HC के वकील, 12 को बुलायी जीबी की बैठक

 
Ranchi: राजधानी के धुर्वा इलाके में बन रहे नए हाईकोर्ट भवन को लेकर एडवोकेट एसोसिएशन, झारखंड हाईकोर्ट ने 12 सितंबर को जीबी की बैठक बुलायी है. एसोसिएशन के द्वारा पत्र जारी कर कहा गया कि सभी पदाधिकारी एवं सदस्य 12 सितंबर को 1:30 बजे व्हाइट हॉल में उपस्थित रहेंगे. बता दें कि गुरुवार 8 सितंबर को एडवोकेट जनरल, एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कई अधिवक्ता गण नवनिर्मित हाईकोर्ट का निरीक्षण करने पहुंचे थे. जहां कई खामियों को दर्शाते हुए अधिवक्ताओं के लिए बन रहे चैंबर संख्या पर जिरह हुई. इसे पढ़ें- कांके">https://lagatar.in/ncb-team-raids-against-drug-dealers-in-kanke-two-arrested/">कांके

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कुल 200 चैंबर का हो रहा है निर्माण, एसोसिएशन लगातार कर रहा है विरोध

बता दें कि नये हाईकोर्ट भवन का निर्माण शुरू होने के पूर्व से ही अधिवक्ताओं के द्वारा यह मांग की गई थी कि चैंबर्स की संख्या बढ़ायी जाये. आने वाले 40 साल को देखते हुए चैंबर्स बनाया जायें ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को समुचित व्यवस्था मिल सके एवं उन्हें भी सम्मान मिले जिसके वे हकदार हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है. पहले से ही 95 चैंबर्स अधिवक्ताओं को निर्गत किया जा चुका है. वहीं मिली जानकारी के अनुसार, नये हाईकोर्ट भवन में एजी बिल्डिंग नहीं बनाया गया है. मतलब जो मौजूदा स्थिति है वही नए हाईकोर्ट भवन में भी देखने को मिल सकता है, ऐसे में एसोसिएशन ने सरकार की निंदा करते हुए आर-पार की लड़ाई को लेकर आगामी 11 सितंबर को बैठक बुलायी है. इसे भी पढ़ें- हाईकोर्ट">https://lagatar.in/retired-high-court-judge-amitav-kumar-gupta-appointed-as-new-chairman-of-jharkhand-state-electricity-regulatory-commission/">हाईकोर्ट

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नये हाईकोर्ट भवन में कम से कम 500 चैंबर्स बने - एसोसिएशन

इसे लेकर जब हमने एसोसिएशन की अध्यक्ष ऋतु कुमार और महासचिव नवीन कुमार से बातचीत की, तो  उन्होंने बताया कि चैंबर का मुद्दा गर्माता जा रहा है. बीते चुनाव में यह साफ नजर आया था की चैंबर की कमी की वजह से कई अधिवक्ताओं में नाराजगी है. उन्हें भी सम्मानजनक रूप से वकालत करने का अधिकार है. कई अधिवक्ता 20 वर्ष से वकालत कर रहे हैं. अब उन्होंने वरीयता भी हासिल कर ली है. लेकिन चैंबर की कमी की वजह से उन्हें कई समस्याओं से जूझना पड़ता है. [wpse_comments_template]    
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