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DMFT के पैसों से साहब के दफ्तर की रंगाई-पुताई हुई, कोरोना से बचाव पर 10 करोड़ खर्च

Ranchi: डिस्ट्रिक्ट मिनरल ट्रस्ट फंड(DMFT) के पैसों से समाहरणालय की रंगाई पुताई हुई. कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सेनेटाइजर खरीदे गये. बोकारो जिला में कोरोना से बचाव के लिए प्रचार प्रसार पर 10.90 करोड़ रुपये खर्च किये गये.
 

Ranchi: डिस्ट्रिक्ट मिनरल ट्रस्ट फंड(DMFT) के पैसों से समाहरणालय की रंगाई पुताई हुई. कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सेनेटाइजर खरीदे गये. बोकारो जिला में कोरोना से बचाव के लिए प्रचार प्रसार पर 10.90 करोड़ रुपये खर्च किये गये. कोविड-19 के दौरान वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान DMFT के खर्च से संबंधित ब्योरे में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

कोविड-19 के दौरान व्यापारिक गतिविधियों के बंद होने की वजह से सरकार को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. साथ ही कोविड-19 से बचाव और पीड़ितों को इलाज के लिए सरकार को अतिरिक्त पैसों की जरूरत हुई. 

 

इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय खान मंत्रालय ने राज्यों को DMFT में उपलब्ध कुल राशि में से 30% राशि कोविड-19 से निपटने पर खर्च करने की अनुमति दी. कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य में PM केयर फंड के अलावा DMFT के पैसों का इस्तेमाल किया गया. राज्य के विभिन्न जिलों में कोविड-19 के दौरान निजी डाक्टरों की सेवा ली गयी. इन डॉक्टरों का भुगतान DMFT से किया गया. 

 

राज्य के विभिन्न जिलों में निजी डॉक्टरों की सेवा ली गयी और विशेषज्ञ डॉक्टरों को 1.50 लाख प्रति माह और MBBS को 1.05 लाख रुपये प्रति माह की दर से भुगतान किया गया. इसके अलावा DMFT के पैसों से मेडिकल उपकरण जैसे CT Scan मशीन, कोविड की जांच के लिए किट आदि की खरीद की गयी.

 

 

 

कोविड-19 के दौरान सभी जिलों द्वारा खर्च की गयी राशि का ब्योरा तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया. सरकार को भेजे गये इस ब्योरे में DMFT से कुछ ऐसे खर्चों का भी उल्लेख किया गया है, जिसे नियमित खर्च के दायरे में नहीं माना जा सकता है. इस तरह के खर्चों में समाहरणालय की रंगाई पुताई, समाहरणालय में स्ट्रीट लाइट लगाना सहित अन्य तरह के खर्चे शामिल हैं. 

 

 

 

नियमानुसार, DMFT का खर्च प्रभावित क्षेत्र में करने का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या समाहरणालय DMFT के प्रभावित क्षेत्र के दायरे में है या नहीं? दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि DMFT मैनेजिंग कमेटी की बैठकों में पुलिस अधिकारियों की ओर से ज़्यादातर CCTV लगाने, ड्रोन खरीदने और जिम बनाने के सुझाव दिये गये. महालेखाकार ने कुछ जिलों के ऑडिट के दौरान इस तरह के खर्चों को अनियमित माना है.

 

 

 

रामगढ़ जिला द्वारा 2020-21 में DMFT से किये गये खर्चों का जो ब्योरा तैयार किया गया है. उसमें कोविड-19 के दौरान पीड़ितों के इलाज के लिए 1.53 करोड़ रुपये की लागत से सदर अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों के चिकित्सीय उपकरण खरीदने का उल्लेख किया गया है. 

 

 

 

 

 

इसके अलावा 67.52 लाख रुपये की लागत पर मास्क और सेनेटाइजर खरीदने का उल्लेख किया गया है. रामगढ़ जिले में DMFT के खर्च के ब्योरे में 24.79 लाख रुपये की लगत से समाहरणालय परिसर में स्ट्रीट लाइट लगाने का उल्लेख किया गया है. 

 

 

 

 

 

रामगढ़ जिले में 10.20 लाख रुपये के खर्च पर उपायुक्त कार्यालय के चहारदीवारी की रंगाई पुताई की गयी. 22.51 लाख रुपये खर्च कर उपायुक्त कार्यालय में कार पार्किंग शेड का निर्माण किया गया. उपायुक्त कार्यालय के गोपनीय शाखा के लिए 2.22 लाख रुपये की सामग्रियां खरीदी गयीं और 15.95 लाख रुपये की लागत पर समाहरणालय में हाईस्पीड इंटरनेट लगाया गया. इस तरह सिर्फ समाहरणालय पर BMFT का 75.67 लाख खर्च किया गया.

 

 

 

 

 

धनबाद जिले द्वारा तैयार DMFT की रिपोर्ट में कोविड-19 के दौरान पीड़ितों के इलाज के लिए आवश्यक चिकित्सीय उपकरणों की खरीद पर 75.86 लाख रुये खर्च का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा 1.14 करोड़ रुपये की लागत पर Rapid Antigen Test Kit खरीदने का उल्लेख किया गया है. 
KIT खरीद को कोविड-19 की जांच के लिए निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए आवश्यक करार दिया गया है.

 

 

 

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने एक महीने में तीन लाख लोगों का टेस्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया था. स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए एक लाख किट उपलब्ध कराया था. टेस्ट के लक्ष्य के पूरा करने के लिए गुड़गांव की कंपनी M/S Biosesor Health Care से 25 हजार किट 1.14 करोड़ रुपये में खरीदे गये.

 

 

 

बोकारो जिले ने कोविड-19 के दौरान DMFT के खर्च में विभिन्न क्षेत्रों में खर्च करने का उल्लेख किया गया है. जिले की रिपोर्ट में सदर अस्पताल के लिये 16.96 करोड़ रुपये की लागत पर चिकित्सीय उपकरण खरीदने का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा रिपोर्ट में कोविड-19 से बचाव के प्रचार प्रसार पर 10.90 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी गयी है. 

 

 

 

 

यह राशि पांच बार में होर्डिंग लगाने, पंप्लेट बांटने और GEO Taging पर खर्च की गयी है. जिले में प्रचार प्रसार पर पहली बार दो करोड़ 19 हजार, दूसरी बार में 1.16 करोड़, तीसरी बार में 2.75 लाख, चौथी बार में 7.54 करोड़ और पांचवी बार में 18.35 लाख रुपये खर्च किया गया है.
गोड्डा जिले की रिपोर्ट में मैनेजिंग कमेटी बैठक में पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध खनन रोकने के लिए CCTV लगाने का प्रस्ताव देने का उल्लेख है. इसके अलावा ट्राफिक कंट्रोल करने उपकरणों और दो ड्रोन खरीदने का सुझाव दिया गया. 

 

 

 

 

पुलिस अधीक्षक ने समाहरणालय के नये भवन नें DMFT के पैसों से ओपन जिम बाना का सुझाव दिया गया. पुलिस अधीक्षक द्वारा दिये गये इन सुझाव को मैनेजिंग कमेटी की बैठक में पारित किया गया, साथ ही इसे DMFT Governing Council की बैठक में पारित कराने का फैसला किया गया. लेकिन रिपोर्ट में इन प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है.

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