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सिर्फ डिग्री के लिए नहीं, समाज और राष्ट्र को कुछ देने के लिए करें शोध : कुलपति

विभावि के वीसी ने शोधार्थियों से किया सीधा संवाद, पहली बार विश्वविद्यालय में हुआ ऐसा कार्यक्रम विश्वविद्यालय की व्यवस्था से संबंधित रहीं शोधार्थियों की अधिकांश समस्याएं Hazaribagh : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को कुलपति-शोधार्थी सीधी वार्ता का आयोजन किया गया. इस मौके पर कुलपति प्रोफेसर डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने सभी शोधार्थियों से सीधा संवाद किया और उनकी हर बात को धैर्य पूर्वक सुना तथा अपनी डायरी में नोट किया. विनोबाभावे विश्वविद्यालय में इस तरह का पहला सीधा संवाद किया गया. अंत में अपने विचार रखते हुए कुलपति ने कहा कि शोधार्थियों की अधिकांश समस्याएं विश्वविद्यालय की व्यवस्था से संबंधित है. वह आज से ही उसमें सुधार लाने का काम करेंगे. उन्होंने आह्वान किया कि शोधार्थी अपने शोध को गंभीरता से लें और इस कार्य को ईमानदारी से करें. जो शोधार्थी सरकार से फेलोशिप ले रहे हैं, उनसे कुलपति ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी अधिक है. यह भी कहा कि सिर्फ पीएचडी उपाधि के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को कुछ देने के लिए शोध करें. कुलपति ने शोधार्थियों को मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव से बचने का आग्रह किया. उन्होंने बहुत जल्द एक और बैठक आयोजित करने की बात कही. हजारीबाग">https://lagatar.in/category/jharkhand/north-chotanagpur-division/hazaribagh/">हजारीबाग

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इन शोधार्थियों ने किया सीधा संवाद

कुलपति से सीधा संवाद में शोधार्थी मिताली गुप्ता, भैरव यादव, संगीता कुमारी सिंह, फातिमा प्रवीण, मनोज कुशवाहा, अभिषेक मिश्र, उदय कुमार मेहता, रुखसाना बानो, जीतेंद्र भारती, धर्मेंद्र कुमार, पुष्कर कुमार, विभा कुमारी तथा फजल ने अपनी परेशानियों को रखा.

शोधार्थियों की ओर से रखी गई विभिन्न मांगें

यूजीसी फेलोशिप के लिए प्रत्येक महीने की उपस्थिति का ससमय यूजीसी के साइट पर अपलोड करना, आवासीय किराया 8% से बढ़ाकर अन्य विश्वविद्यालयों की भांति 9% करना, पुराने टॉपिक पर पुनः पंजीयन की अनुमति प्रदान करना, गैर फेलोशिप वाले शोधार्थियों को विश्वविद्यालय की ओर से आर्थिक सहयोग उपलब्ध करवाना, जेआरएफ से एसआरएफ संबंधी कार्य प्रक्रिया को विश्वविद्यालय स्तर पर ससमय पूर्ण करना आदि मांगें शोधार्थियों की ओर से रखी गईं.

शोधार्थियों ने की शिकायत, आर्थिक शोषण की बात भी आयी सामने

शोधार्थियों ने शिकायत की कि पिछले तीन वर्षों से विभावि में एक तरफ जहां कोई स्तरीय संगोष्ठी, कार्यशाला आदि का आयोजन नहीं हो पाया, वहीं दूसरी तरफ विभागीय व केंद्रीय पुस्तकालयों में कोई भी पुस्तक, जर्नल आदि का क्रय भी नहीं हुआ. इससे शोध को काफी क्षति हुई. यह भी बताया कि एक कर्मचारी ने शोधार्थियों का काफी आर्थिक शोषण किया एवं हाल में हुए उनके स्थानांतरण का स्वागत भी किया. पिछले तीन वर्षों में शोधार्थियों से काम के एवज में पैसे मांगे जाने की भी बात कही गई. वार्ता में संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक के अलावा काफी संख्या में शोधार्थी उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापित करते हुए शोधार्थी पुष्कर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में यह पहला मौका है, जब शोधार्थीयों की बातें सुनी जा रही है. सीधा संवाद के दौरान संचालन डॉ. गंगानाथ झा ने किया. इसे भी पढ़ें : जेपी">https://lagatar.in/jp-nadda-said-on-patna-meeting-those-whom-indira-gandhi-put-in-jail-are-colluding-with-the-congress/">जेपी

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