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दवा में हेराफेरी की जांच के पहले डॉक्टर ने त्यागपत्र दिया और फार्मासिस्ट ड्यूटी से भागा

Ranchi:  गुमला सदर अस्पताल में दवा में हेराफेरी की जांच के पहले ही डॉक्टर आशीष कुमार बसंत ने त्यागपत्र दे दिया है. हेराफेरी में शामिल फार्मासिस्ट अर्पनदीप टोप्पो ड्यूटी से गायब हो गया है. दवा की हेराफेरी के दौरान दोनों के बीच पैसों का आदान प्रदान हुआ था. डॉक्टर आशीष कुमार बसंत गुमला सदर अस्पताल में (Bid Based SMO) में पदस्थापित थे. टोप्पो आउटसोर्सिंग पर अस्पताल में फार्मासिस्ट का काम कर रहा था.

 

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दवा ले जाते समय डॉक्टर द्वारा रात के 10.52 बजे फार्मासिस्ट को दिया गया 501 रुपया.

 

दवा की हेराफेरी के इस मामले में उपायुक्त ने उन्हें मिली शिकायत की जांच करायी. जांच अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण में डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों को दोषी पाया. जांच में पाया गया कि आधी रात को दवा ले जाते वक्त डॉक्टर ने फार्मासिस्ट को 501 रुपये दिये थे. बाद में दवा लौटाने पर फार्मासिस्ट ने Snehashish Newborn & Child Care के खाते में 1001 रुपये लौटाया. यह नर्सिंग होम डॉक्टर बसंत की बतायी जाती है. पैसों का लेनदेन पे-फोन के माध्यम से किया गया था. 

 

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6-2-2026 को डॉक्टर की पत्नी द्वारा वापस की गयी दवाईयों की प्राप्ति रसीद.

 

जांच अधिकारी ने इस स्थिति के मद्देनजर पूरे प्रकरण में दोनों की मिलीभगत होने के आधार पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की. लेकिन इससे पहले ही डॉक्टर ने त्यागपत्र दे दिया. 10 फरवरी 2026 को दिये गये त्यागपत्र में डॉक्टर ने लिखा कि वह अगस्त 2025 से सदर अस्पताल गुमला में पदस्थापित हैं. उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. उनके पिता बीमार है. ऐसी स्थिति में वह नौकरी नहीं कर सकते हैं. इसलिए त्यागपत्र दे रहे हैं. दूसरी तरफ फार्मासिस्ट ने अस्पताल के उपाधीक्षक पर डॉक्टर आशीष बसंत को बचाने और उसे प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए डयूटी से गायब हो गया. 

 

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दवा वापस करने के बाद फार्मासिस्ट द्वारा नर्सिंग होम के वापस किया गया 1001 रुपया.

 

जानकारी के मुताबिक फार्मासिस्ट ने 13 फरवरी 2026 को उपायुक्त को एक शिकायती पत्र भेजा. इसमें उसने लिखा कि डॉक्टर आशीष बसंत 5 फरवरी 2026 की रात को दवा वितरण केंद्र पर अपनी पत्नी के साथ पहुंचे. दवा वितरण केंद्र का ताला खुलवाया और कैंप में जाने के नाम पर खुद ही दवा निकाला और ले गये. इस दौरान उन्होंने फारमासिस्ट के मोबाईल पर पे-फोन के सहारे 501 रुपया डाल दिया. जाते वक्त डॉक्टर बसंत ने कहा कि कोई दिक्कत हो तो वह उन्हें फोन करे. 

 

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कुछ दवाइयों की सूची जो आधी रात निकाली गयी थी.

 

इस बात से शक होने पर उसने डॉक्टर बसंत द्वारा लिये गये दवा की सूची बनायी. दूसरे दिन मामले की जानकारी अस्पताल के उपाधीक्षक को दी. लेकिन उपाधीक्षक ने डॉक्टर के बचाने के उद्देश्य से उसे गालियां दी. साथ ही दवा की हेराफेरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी दी. इसके बाद उसने डॉक्टर बसंत को उपाधीक्षक द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी दिये जाने की जानकारी दी. जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर आशीष कुमार बसंत की पत्नी ने सारी दवाइयां वापस कर दी.

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