Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, पहली बार टोटल एक्स्ट्रा पेरिटोनियल विधि से किया गया इंगुइनल हर्निया का ऑपरेशन

Advertisement
Advertisement

झारखंड के किसी भी सदर अस्पताल में टोटल एक्स्ट्रा पेरिटोनियल विधि से यह पहली सर्जरी है

Ranchi : सदर अस्पताल रांची के डॉक्टरों ने शनिवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. लेप्रोस्कोपीक सर्जन डॉ. अजीत के नेतृत्व में एनेस्थेटिक डॉ. दीपक, डॉ. विकास वल्लभ और ओटी स्टाफ ने पहली बार टीईपी (टोटल एक्स्ट्रा पेरिटोनियल) विधि से इंगुइनल हर्निया का सफल ऑपरेशन किया है. झारखंड के किसी भी सदर अस्पताल में पहली बार इस जटिल ऑपरेशन को किया गया है. इस ऑपरेशन में एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है, मगर सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने बिना किसी खर्च के मरीज का सफल ऑपरेशन कर दिया.

टीईपी विधि से ऐसे हुआ मरीज का ऑपरेशन

इस विधि में बिना पेट के अंदर गए हुए, पेट की दीवार की परतों के बीच जगह बनाकर, हर्निया की थैली को छुड़ाकर उसे काट कर बांध देते हैं और फिर प्रोलिन जाली बिछा दी जाती है. यह पूरी प्रक्रिया तीन अत्यंत छोटे छेदों से की जाती है. यह एक बहुत ही अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सर्जरी मानी जाती है. इस ऑपरेशन को करने के लिए हाई स्किल की जरुरत होती है. आम तौर पर निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में संपन्न मरीज ही इसे करवाते हैं. इस सर्जरी के लिए मरीज को एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं.

दर्द से परेशान जय किशुन डॉक्टर को दे रहे धन्यवाद

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/03/2-5.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> रांची के कोकर के रहनेवाले जय किशुन यादव, काफी लंबे समय से दाहिने तरफ की हर्निया से परेशान थे. वह असहनी दर्द और  भारीपन को झेल रहे थे. अगस्त में वह सदर अस्पताल आये. यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें हर्निया बताया. इलाज के लिए दौरान ही वह जॉन्डिस के शिकार हो गये. जॉन्डिस ठीक होने के बाद सर्जरी के लिए उन्हें काफी इंतजार करना पड़ा. पूरी प्रक्रिया होने और डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद उन्हें सर्जरी का समय दिया गया. सर्जरी से पहले परेशान जय किशुन कुछ ही घंटों के बाद से डॉक्टरों को धन्यवाद दे रहे हैं. जय किशुन ने कहा कि सदर अस्पताल के डॉक्टरों खासकर डॉ. अजीत ने उन्हें एक नया जीवन दिया है. उनके पास ना तो इलाज के लिए पैसे थे और न ही आयुष्मान कार्ड था, मगर सदर अस्पताल में उनका फ्री इलाज हो गया. सर्जरी के कुछ घंटे बाद ही जय किशुन परिजनों से बातचीत कर रहे हैं और चल फिर पा रहे हैं. डॉ. अजीत ने बताया कि सोमवार तक मरीज को छुट्टी भी दे दी जायेगी.

इंगुइनल हर्निया के बारे में क्या कहा डॉ. अजीत ने

इंगुइनल हर्निया के बारे में डॉ. अजीत ने बताया कि इसमें मरीज की छोटी आंत अंडकोष में घुस जाती है. अंडकोष में छोटी आंत फंस जाने पर मरीज के जीवन को भी खतरा हो सकता है. इस बीमारी में मरीज को दर्द और भारीपन महसूस होता है. यह सर्जरी हमलोगों के लिए चुनौतीपूर्ण था, मगर हमारी पूरी टीम ने इस चुनौती को बारीकी से पार कर लिया. हमलोगों को खुशी है कि मरीज कुछ घंटे बाद ही बातचीत कर रहा है और चल फिर भी रहा है. इस जटिल सर्जरी में एनेस्थेटिक डॉ. दीपक, डॉ. विकास वल्लभ और ओटी स्टाफ - सरिता, शशि, लखन, सुशील, मुकेश, पूनम का अहम योगदान रहा. क्या है इस विधि के फायदे • रक्तस्राव नगण्य होता है. • दर्द बहुत कम होती है. • मरीज अपने दिनचर्या में बहुत जल्द (2-3दिनों में) वापस लौट जाते हैं. • चीरा का कोई दाग नहीं रहता है. • दोबारा हर्निया होने का खतरा ओपन विधि से बहुत कम होता है.  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही