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लातेहार: जर्जर भवन में जान हथेली पर रखकर इलाज करते हैं चिकित्सक

 
Kamrol Arfi Latehar: बालूमाथ, बारियातु एवं हेरहंज प्रखंड के ग्रामीणों के चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने वाला बालूमाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों खुद बीमार है. रोजाना सैकड़ों मरीजों का इलाज तो हो रहा है, लेकिन सुविधा के नाम पर व्यवस्था शून्य है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जर्जर भवन दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहा है. बरसात में छत से टपकने वाली बूंद-बूंद पानी मरीज और स्वास्थ्यकर्मियों को आतंकित कर देता है. समय-समय पर छत की टूटती परत भी गिरकर अपनी बदहाली का एहसास करा देती है. यहां इलाज कराने पहुंचे मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी किसी अनहोनी का डर सताता रहता है.

सीएचसी भवन की दीवारें दरक चुकी हैं

जर्जर भवन में क्षतिग्रस्त छत के नीचे जान जोखिम डाल कर चिकित्सक समेत स्वास्थ्यकर्मी मरीजों का इलाज करने को विवश हैं. विभाग की ओर से अब तक कोई समुचित पहल नहीं की गई है. वहीं रिपेयरिंग के नाम पर विभाग द्वारा अस्पताल के जर्जर भवन का रंग रोगन जरूर करा दिया जाता है, लेकिन दरकती दीवारें और छत से निकली सरिया बताने के लिए काफी है कि स्वास्थ्यकर्मी कैसे अपनी जान हथेली पर रखकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी सरकार से बार-बार गुहार लगा रहे हैं कि या तो पुराने भवन को तोड़कर नया भवन बनाया जाए या फिर अस्पताल को कहीं और शिफ्ट कर दिया जाए, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर पहल शून्य है.

मैन पावर की कमी है स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में बड़ी बाधाः डॉ प्रकाश

इस सन्दर्भ में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रकाश बड़ाइक का कहना है कि बालूमाथ सीएचसी पिछले लगभग 15 वर्षों से जिमखाना में चल रहा है. पर्याप्त जगह के आभाव में मरीजों को समुचित सुविधा नहीं मिल पा रही है. जिससे मरीजों को बेहतर सुविधा के लिए रेफर करने की विवशता है. नये अस्पताल भवन का निर्माण कार्य धीमा होने के कारण तत्कालिक व्यवस्था ज़रूरी है. मैन पावर की कमी भी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में बड़ी बाधा है. इसे भी पढ़ें - ">https://lagatar.in/dc-of-6-districts-told-there-are-no-infiltrators-among-santals-high-court-asked-also-tell-how-number-of-tribals-decreased/">

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