Ranchi: आयकर विभाग के सर्वे में PANAS Realtors LLp और दयानंद मोदी ग्रुप के ठिकानों से 120 करोड़ रुपये की अघोषित और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. इसके अलावा बिल्डर्स एग्रिमेंट के दौरान 80 करोड़ रुपये कैपिटल गेन टैक्स नहीं चुकाने का मामला भी पकड़ में आया है. रांची में सर्वे के दौरान 100 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी पकड़े जाने का यह पहला मामला है. पूछताछ के दौरान बिल्डर और फ्लैट खरीदने वालों ने नकद लेन-देन की बात स्वीकार की.
आयकर विभाग द्वारा 15 जुलाई को शुरू हुआ सर्वे 17 जुलाई की देर रात समाप्त हो गया. सर्वे के दौरान दोनों बिल्डरों के ठिकानों से अघोषित आय और अघोषित संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. प्रारंभिक जांच के दौरान इन बिल्डरों ने 120 करोड़ की अपनी वास्तविक आमदनी छिपायी और इस रकम से संपत्ति अर्जित की. बिल्डरों ने इस रकम से खरीदी गयी संपत्ति की भी जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी है.
सर्वे के दौरान मिले दस्तावेज में वर्णित तथ्यों के आधार पर 90 करोड़ रुपये के कैपिटल गेन टैक्स की भी चोरी का मामला पकड़ में आया है. इन बिल्डरों ने कुछ कंपनियों के साथ भी डेवलपमेंट एग्रिमेंट किया है. लेकिन जिन कंपनियों के साथ डेवलपमेंट एग्रिमेंट किया गया, उन कंपनियों ने कैपिटल गेन टैक्स जमा नहीं किया है.
आयकर अधिनियम की धारा 45(1) के तहत किसी कंपनी द्वारा बिल्डर के साथ डेवलपमेंट किया जाने के बाद कंपनी को उसी साल कैपिटल गेन टैक्स जमा करना है. कंपनी की जमीन पर बिल्डर द्वारा निर्माण कार्य शुरू नहीं किये जाने की स्थिति में भी कैपिटल गेन टैक्स उसी साल जमा करना है, जिस साल डेवलपमेंट एग्रिमेट किया गया.
आयकर विभाग ने सर्वे के दौरान बिल्डरों के डिजिटल डिवाइस का डिलिटेड डाटा निकालने के लिए कोलकाता से Forensic Team को बुलाया था. इस टीम द्वारा बिल्डरों के मोबाइल से निकाले गये डिलिटेड चैट में फ्लैट की बिक्री के दौरान नकद लेन-देन का ब्योरा दर्ज था. चैट में मिले ब्योरे के आलोक में आयकर विभाग के अधिकारियों के कुछ फ्लैट के खरीददारों को समन भेज कर बुलाया था और उससे पूछताछ की थी. पूछताछ के दौरान बिल्डरों और फ्लैट खरीदने वालों ने खरीद बिक्री के दौरान नकद लेन-देन की बात स्वीकार की.
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