Ranchi : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामले में राज्य सरकार द्वारा CID की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में बंद लिफाफे में पेश करने पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि CID की रिपोर्ट बंद लिफाफे में ही क्यों दी जा रही है, वो भी 4 हफ्ते बाद.
बाबूलाल ने आगे कहा कि वो तो भला है कि अदालत ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सिर्फ 48 घंटे का वक्त सरकार को दिया है. सवाल किया कि क्या सरकार पारदर्शिता से डर रही है? क्या 22 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के पीछे ऐसी कोई जानकारी है, जिसे सरकार सार्वजनिक नहीं करना चाहती?
भाजपा नेता यही नहीं रूके. उन्होंने आगे कहा कि मामला सिर्फ परीक्षाएं रद्द करने तक सीमित नहीं है. असली सवाल यह है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी कैसे हुई, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उन लाखों छात्रों का क्या होगा, जिन्होंने इन परीक्षाओं के लिए वर्षों तक तैयारी की.
बाबूलाल ने JSSC-CGL मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछली बार CID की जांच में भी कई सवाल उठे थे. उनके अनुसार, JSSC-CGL परीक्षा से पहले नेपाल, बिहार और बंगाल में 135 प्रश्नों के लीक होने की जानकारी सामने आई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि CID ने इस मामले को सिर्फ ठगी का मामला बताया और हाईकोर्ट को गुमराह किया.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं के मन में अब सवाल है कि JPSC-JSSC की 22 परीक्षाओं के मामले में भी कहीं वही स्थिति तो नहीं दोहराई जा रही है. उन्होंने कहा कि कोर्ट को जवाब बंद लिफाफे में दिया जा सकता है, लेकिन लाखों युवाओं के सवालों को बंद लिफाफे में बंद नहीं किया जा सकता.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि युवाओं को न्याय दिलाने के लिए मामले की CBI जांच जरूरी है