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बीए- एमए करने से नहीं मिलेगी नौकरी, हुनर जरूरी : राज्यपाल

Ranchi : अब शिक्षा की पद्धति बदल चुकी है. मैट्रिक, बीए, एमए पास युवा नौकरी के लिए भटक रहे हैं. अगर आप मैट्रिक पास हो, बीए कर लें, एमए कर लें, नौकरी नहीं मिलेगी. अगर आपको कोई हुनर नहीं मालूम है, तो आपका पढ़ना- लिखना बेकार है. ये बातें राज्यपाल रमेश बैस ने गुरुवार को रांची विश्वविद्यालय स्थित आर्यभट्ट सभागार में संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत जनजातीय युवा ग्रामीण उद्यमी प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में कही. वे कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने रोजगार के लिए गांवों से हो रहे पलायन पर भी चिंता जताई. कहा कि आज गांव उजाड़ रहे हैं और शहर आबाद हो रहे हैं. जब तक शहर की सुविधाएं गांवों में नहीं देंगे. तब तक गांवों का विकास नहीं होगा. उन्होंने ज्ञान व रोजगार परख शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि युवा नौकरी के लिए पढ़ाई न करें. बल्कि जानकारी ग्रहण करने के लिए पढ़ाई करें. अगर आप में काबिलियत होगी, तो आपको नौकरी भी मिलेगी और आप व्यापार भी कर सकेंगे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/10/2-27.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> इसे भी पढ़ें –सेना">https://lagatar.in/ed-to-probe-sale-of-more-than-two-dozen-large-plots-in-ranchi-including-4-55-acres-of-army-land/">सेना

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पढ़े-लिखे लोगों को मालूम है खेती का भविष्य  

राज्यपाल ने कहा कि देखा जा रहा है कि अब पढ़ने-लिखने के बाद भी लोग गांव की ओर लौट रहे हैं. उनको मालूम है कि भविष्य अब खेती है और वो अब गांव में ही विकास करेंगे. शहर में लोग ट्रैफिक, प्रदूषण से परेशान हैं. लोग अब खुले जगह की ओर जाना चाहते हैं. और गांव से कोई अच्छा स्थान है. कहा- जब पढ़े-लिखे लोग गांव जाएंगे, युवा प्रशिक्षित होकर गांव लौटेंगे, वहां व्यवसाय शुरू करेंगे, तो उनकी आर्थिक स्थिति ठीक होगी. इससे गांव का भी विकास होगा.

युवाओं को विलेज इंजीनियर बनने का मिले मौका

मौके पर कौशल विकास और उद्यमशीलता एवं इलेक्ट्रिनिकी और प्रौद्योगिकी सूचना राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ग्रामीण उद्यमी परियोजना का उदेश्य आने वाले दिनों में लाखों युवाओं के लिए विलेज इंजीनियर बनने का अवसर प्रदान करना है. ताकि पलायन को रोका जा सके और लोकल स्तर पर ही रोजगार मिले.

165 युवाओं को दिया गया प्रमाण पत्र

कार्यक्रम में 165 युवाओं को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र दिया गया. यह प्रशिक्षण उन्हें जोन्हा स्थित सेवा भारती के केंद्र में दिया गया. 20 अगस्त से उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा था. इसके तहत उन्हें कृषि में मशरूम कल्चर, आईटी, ई-गर्वनेंस, पल्बिंग, इलेक्ट्रिशियन और मोटरसाइकिल मेंटनेंस का प्रशिक्षण दिया गया.

गांव में रोजगार मिले तो बाहर जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत

राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष ने कहा कि असम, अंडमान निकोबार, त्रिपुरा, प बंगाल में झारखंड के लोग हैं. यहां दसवीं, बारहवीं पास को नौकरी नहीं मिलती है. इसका विकल्प ढूंढ़ना है. इसलिए युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे उद्यमी बनें. गांव में ही उन्हें रोजगार मिलेगा तो बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद 

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद समीर उरांव, दीपक प्रकाश, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पद्मश्री अशोक भगत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अतुल कुमार तिवारी, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के सीईओ वेदमानी तिवारी, रांची की महापौर आशा लकड़ा, सांसद संजय सेठ, विधायक नवीन जायसवाल, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय समेत कई अन्य उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें – राज्य">https://lagatar.in/the-people-of-the-state-are-angry-will-give-a-befitting-reply-raghuvar-das/">राज्य

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