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महिला आरक्षण बिल पास होने में रोड़ा न बनें, भ्रमित न करे विपक्ष : स्मृति इरानी

New Delhi : महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सोनिया गांधी समेत विपक्षी दलों के नेताओं को करारा जवाब दिया. कहा कि ये नेता बिल पास होने में रोड़ाबनें. आरोप लगाया गया है कि आप ओबीसी और मुस्लिम आरक्षण क्यों नहीं देते हैं. मुझसे ज्यादा अनुभवी लोग जो वर्तमान में बिना माइक और पीठ की अनुमति के दांत चबा-चबाकर बोल रहे हैं, उनको शायद इस बात का आभास नहीं है कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण वर्जित है. मैं गुजारिश करना चाहती हूं यह भारत वह भारत है, जिसके बाद व्यवस्थाएं डिजिटली भी पहुंची हैं. विपक्ष महिला आरक्षण पर भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, लोग इस भ्रम में न फंसे, इसलिए तथ्यों का आना जरूरी है. कुछ लोग दांत चबा-चबाकर बोल रहे हैं.

अपने शब्दों को केवल कागजों या भाषण तक ही सीमित न रखें

उन्होंने कहा, जब यह बिल लाया गया तो कुछ लोगों ने कहा कि यह "हमारा बिल" है. प्रस्तावित बिल के एक लेख में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि तीसरे आम चुनाव में एससी-एसटी की महिलाओं के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं होगी. लेकिन इस सरकार द्वारा लाया गया बिल इस बिल के लागू होने के 15 साल बाद तक महिलाओं को आरक्षण की गारंटी देता है. ईरानी ने कहा हमने महिलाओं को गिनने लायक बना दिया है. और अब समय आ गया है कि आप आगे आएं और अपने शब्दों को केवल कागजों या भाषण तक ही सीमित न रखें, बल्कि कार्रवाई के साथ बोलें और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करें.

संविधान के साथ छेड़छाड़ करना कांग्रेस की पुरानी आदत

ईरानी ने कहा कि ​सफलता के कई बाप होते हैं, असफलता का कोई नहीं. कल जब सदन में यह विधेयक आया तो कई लोगों ने इसे अपनी राजनीतिक विरासत बताया. हमको बार-बार बताया गया कि एक परिवार ने 73वां, 74वां संविधान संशोधन पारित कराया. वह काम पीवी नरसिम्‍हा राव जी ने किया, जिनके मरने के बाद उनके ही पार्टी हेडक्‍वार्टर में उनको नमन करने का मौका नहीं दिया गया. पीएम मोदी का धन्‍यवाद देते हुए स्‍मृति ने कहा कि आज लक्ष्‍मी ने संवैधानिक रूप लिया है. यहां बार-बार अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम लिया गया. देवेगौड़ा जी को धन्‍यवाद कहा गया. मैं पीएम और कानून मंत्री का इस बिल के लिये अभिनंदन करती हूं. संविधान के साथ छेड़छाड़ करना कांग्रेस की पुरानी आदत है. हमारे लिये संविधान की किताब पूजनीय है. संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है.

अनुप्रिया सिंह पटेल ने कहा- स्वागत योग्य है महिला आरक्षण बिल

लोकसभा में अपना दल की सांसद अनुप्रिया सिंह पटेल ने कहा, महिला आरक्षण बिल समय की जरूरत है. कई छोटे देशों ने महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित कर ली है. ये कोई नया बिल नहीं है, इसका इतिहास 27 साल पुराना है. सबसे पहले 1996 में बिल आया, इसके बाद कई सरकारें बिल लेकर आईं, लेकिन लागू नहीं हो पाया. विपक्ष पिछड़ी जाति से आने वाली महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की मांग कर रहा है, लेकिन ऐसा संभव नहीं है. हमने अच्छी शुरुआत की है. विपक्ष कहता है कि 2024 चुनाव को देखते हुए बीजेपी ये बिल लेकर आई, अगर ये बिल नहीं लाया जाता, तो विपक्ष कहता कि सरकार महिलाओं के हित के बारे में सोचती नहीं है. मैं कहती हूं इसमें किंतु परंतु नहीं होना चाहिए. ये बिल स्वागत योग्य है. मैं मोदी जी का आभार व्यक्त करती हूं.
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