समाज हमारी सामूहिकता और सहकारिता की संरचना है
मोदी ने नसीहत देते हुए कहा, यह हर राजनीतिक दल का दायित्व है कि वह किसी पार्टी और व्यक्ति के विरोध को देश की मुखालफत में न बदले. विचारधाराओं का अपना स्थान है और होना भी चाहिए. राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी हो सकती हैं, लेकिन देश सबसे पहले है. उन्होंने कहा, लोहिया जी का मानना था कि समाजवाद समानता का सिद्धांत है. वह सतर्क करते थे कि समाजवाद का पतन उसे असमानता में बदल सकता है. हमने भारत में इन दोनों परिस्थितियों को देखा है. मोदी ने कहा, हमने देखा है कि भारत के मूल विचारों में समाज वाद-विवाद का विषय नहीं है. हमारे लिए समाज हमारी सामूहिकता और सहकारिता की संरचना है. समाज हमारा संस्कार है, संस्कृति है, स्वभाव है. इसलिए लोहिया जी भारत के सांस्कृतिक सामर्थ्य की बात कहते थे. इसे भी पढ़ें – गरीबों">https://lagatar.in/a-historic-moment-for-the-poor-and-downtrodden-pm/">गरीबोंऔर दलितों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण : पीएम
हरमोहन सिंह यादव लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे
प्रधानमंत्री ने कहा, हरमोहन सिंह यादव लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और उन्होंने विधान परिषद सदस्य, विधायक, राज्यसभा सदस्य और अखिल भारतीय यादव महासभा के अध्यक्ष के रूप में विभिन्न पदों पर कार्य किया. हरमोहन सिंह यादव के चौधरी चरण सिंह और राम मनोहर लोहिया के साथ घनिष्ठ संबंध थे. उन्होंने कहा कि हरमोहन सिंह यादव ने अपने बेटे एवं विधान परिषद के पूर्व सभापति सुखराम सिंह के साथ कानपुर और उसके आसपास कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. मोदी ने कहा कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान कई सिखों के जीवन की रक्षा करने में वीरता के प्रदर्शन के लिए हरमोहन सिंह यादव को 1991 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.कांग्रेस पर निशाना साधा
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे देश में अधिकांश पार्टियों ने विशेष रूप से सभी गैर-कांग्रेसी दलों ने इस विचार को निभाया भी है. मुझे याद है, जब 1971 में भारत-पाकिस्तान का युद्ध हुआ था, तब सभी प्रमुख पार्टियां सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो गई थीं. जब देश में पहला परमाणु परीक्षण किया गया, तो सभी पार्टियां सरकार के साथ डटकर खड़ी हो गई थीं. लेकिन आपातकाल के दौरान जब देश के लोकतंत्र को कुचला गया, तो सभी प्रमुख पार्टियों ने एक साथ आकर संविधान को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी. चौधरी हरमोहन सिंह यादव भी उस संघर्ष के जुझारू सैनिक थे. इसे भी पढ़ें – रांची:">https://lagatar.in/ranchi-announce-the-inclusion-of-sarna-dharma-code-the-newly-elected-president-jmm/">रांची:सरना धर्म कोड को शामिल कराने की घोषणा करें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति- झामुमो [wpse_comments_template]

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