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राज्य के स्वास्थ्य की थोड़ी चिंता कीजिए न महामहिम

आदरणीय महामहिम सादर प्रणाम आशा है आप स्वस्थ व सानंद होंगे. आप बार-बार दिल्ली एम्स जा रहे हैं, इसलिए थोड़ी चिंता है. आप राज्य के प्रथम नागरिक हैं, इसलिए हमारी चिंता फिजूल नहीं कही जा सकती. वैसे, अब आप 75 पार हैं. यानी उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, वहां स्वास्थ्य नरम-गरम रहता है. हम झारखंडी आपकी कुशलता की कामना करते हैं. उम्मीद है कि झारखंड का मौसम आपको स्वास्थ लाभ देगा और आप राज्य के प्रथम नागरिक की भूमिका सही तरीके से निभाएंगे. श्रीमान, अपने पत्रकारीय जीवन में कुछ माह मैंने रायपुर में बिताए हैं. तब मेरा कार्यालय तेलीपाड़ा और निवास सिविल लाइंस में था. सहकर्मियों से मैंने आपके बारे में बहुत सुना. आपसे जुड़ी कहानियां. उनमें अधिकतर सकारात्मक [पाजीटिव] थी. आपकी राजनीतिक ईमानदारी, लोकप्रियता, न्यायप्रियता के किस्से. सुना कि आप साधारण परिवार से हैं. सन 78 में रायपुर नगर निगम के पार्षद चुने गए और 80 में विधायक. 89 में सांसद चुने गए. आप रायपुर से सात बार सांसद बने. आप लोकप्रिय-जनप्रिय नहीं होते, तो यह कैसे संभव होता? आप तो 2003-2004 में वाजपेयी जी की सरकार में मंत्री भी रहे. आप लोकप्रिय नहीं होते, तो बार-बार मुख्यमंत्री पद के लिए आपका नाम क्यों चलता ? छत्तीसगढ में मुख्यमंत्री पद के लिए आपकी तब की पार्टी के पास तीन ही नाम थे. आप, दिलीप सिंह जूदेव और रमन  सिंह. जूदेव विवाद में आ गए. फिर दो ही बचे. आप और रमन  सिंह. भाग्य ने रमन सिंह का साथ दिया. आप पिछड़ गए. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं था कि आप किसी से कम लोकप्रिय या कमतर हैं. आप तो इतने जनप्रिय हैं कि 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार और आज के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हरा दिया था. 2019 में आपकी टिकट कट गई. लगा कि आपका सक्रिय जीवन समाप्त हुआ. पर थोड़े समय बाद ही आप त्रिपुरा के राज्यपाल बनाए गए. मुझे एक पत्रकार के रूप में 6 जुलाई 2021 को बड़ी खुशी हुई, जब आप झारखंड के राज्यपाल बनाए गए. लगा कि आप जैसा अनुभवी, जनप्रिय राजनीतिक राज्यपाल होगा, तो मेरे राज्य का भला होगा. राज्यपाल के रूप में आपने निराश भी नहीं किया. पर साफ -साफ कहूंगा कि इन दिनों थोड़ी चिंता हो रही है. लग रहा है कि आपकी न्यायप्रियता में कहीं -कहीं न चूक हो रही है. इससे आपका बेदाग जीवन प्रभावित हो रहा है. लग रहा है कि आप दबाव में हैं. ईश्वर करे कि मेरा शक-सुबहा फिजूल हो. पर चिंता तो है. देखिए न, वह 25 अगस्त की दोपहर थी, तब से सुन रहा हूं कि चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पत्थर खदान लेने के मामले में अपनी राय आपको भेज दी है. आपने भी माना है कि रिपोर्ट आ गई है. एक सितंबर को आपने प्रतिनिधिमंडल से कहा था कि एक-दो दिन में सब साफ कर देंगे. आज 19  सितंबर है, हम आपकी घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. ऐसा क्यों है श्रीमान ? अब लोग तरह-तरह की बात करने लगे हैं ? आपकी न्यायप्रियता पर सवाल उठने लगे हैं ? ये सवाल दुख का सबब हैं. देखिए न, इसबीच क्या -क्या हुआ. सरकार लटरातू डैम घूम आई. सरकार, सत्तारूढ दलों के विधायक आपके गृह राज्य छत्तीसगढ की राजधानी, कभी आपका चुनाव क्षेत्र रहे रायपुर की यात्रा कर आए. एक सप्ताह मस्ती की. सुना है कि नए रायपुर के जिस होटल में विधायक ठहरे थे, उसका एक दिन का किराया बीस हजार रुपए है. खाना -पीना भी होता है. तीस हजार एक विधायक पर प्रतिदिन खर्च. 40 लोग थे. विमान से आए -गए. डेढ़ -दो करोड़ स्वाहा हो गए. पता नहीं यह पैसा किसका था? अगर राज्य का था, तो किस मद से खर्च हुआ ? फिर सरकार ने विश्वास मत हासिल किया. 15 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद आपसे मिले. चुनाव आयोग की कॉपी मांगी. आपने नहीं दी. अब मुख्यमंत्री कोर्ट जाने वाले हैं. 25 दिन से राज्य ऊहापोह में है. विकास कार्य पर असर पड़ रहा है. मंत्री हों या अफसर सब चिंता में हैं . क्या होगा ? सरकार रहेगी ? हेमंत मुख्यमंत्री रहेंगे ? क्या मुख्यमंत्री की विधायकी रहेगी? क्या विधायक इधर -उधर रहेंगे? तरह-तरह के सवाल और जवाब ? सर, मेरे राज्यवासी चिंतित हैं. राज्य भंवर में हैं. उसे उबारिए न. अब तो कहा जा रहा है कि आप किसी अदृशय सत्ता के दबाव में हैं. ऐसी प्रतिक्रिया हम जैसे आपके शुभचिंतकों को दुख देती है. कल यह भी कहा जा सकता है कि आप विधायक खरीद -बिक्री में सहायक हैं. ऐसे सवाल आपकी न्यायप्रिय छवि पर असर करेंगे न ? मैंने जानकारों से पूछा है, उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग के मन्तव्य के खुलासे के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं है. आप कभी भी खुलासा कर सकते हैं. आप अपनी जगह सही हो सकते हैं. लेकिन, श्रीमान राज्य की भी सोचिए न. जनता दुविधा, चिंता, भंवर में हो तो यह प्रथम नागरिक को शोभा देता है क्या? आप बार-बार एम्स में अपनी जांच करा रहे हैं. आपको अपने स्वास्थय की चिंता है. यह ठीक है. थोड़ी राज्य की भी चिंता कीजिए महामिहम ! पत्र के जवाब की अपेक्षा सहित-          आपका शुभचिंतक संतोष मानव, खबरनवीस,  रांची, 18 सितंबर यह भी पढ़ें : मुस्कुराते">https://lagatar.in/smiling-hemant-and-babulal-rubbing-hands/">मुस्कुराते

हेमंत और हाथ मलते बाबूलाल [wpse_comments_template]

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