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शिक्षक-छात्र संबंध पर डॉ. एम. पी. हसन बोले - AI के दौर में शिक्षक की भूमिका हुई और महत्वपूर्ण

Ranchi News :डॉ. हसन ने कहा कि आज छात्र गूगल, चैटजीपीटी और अन्य AI टूल्स के माध्यम से कुछ ही सेकंड में बड़ी मात्रा में जानकारी हासिल कर सकते हैं. AI ज्ञान और सूचना दे सकता है. लेकिन विवेक, नैतिकता और जीवन में सही निर्णय लेने की समझ नहीं दे सकता. यह भूमिका शिक्षक की है. शिक्षक छात्रों को यह समझाने का काम करता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
 
डॉ. हसन

Ranchi News: शिक्षक दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के निदेशक डॉ. मोहम्मद परवेज हसन ने आज के समय में शिक्षक और छात्र के बदलते संबंध, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और गुरु-शिष्य परंपरा पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में छात्रों के पास जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन सही और गलत के बीच अंतर समझाने में शिक्षक की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है.

 

डॉ. हसन ने कहा कि आज छात्र गूगल, चैटजीपीटी और अन्य AI टूल्स के माध्यम से कुछ ही सेकंड में बड़ी मात्रा में जानकारी हासिल कर सकते हैं. AI ज्ञान और सूचना दे सकता है. लेकिन विवेक, नैतिकता और जीवन में सही निर्णय लेने की समझ नहीं दे सकता. यह भूमिका शिक्षक की है. शिक्षक छात्रों को यह समझाने का काम करता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

 

उन्होंने यह भी बताया कि पहले शिक्षक और छात्र के बीच व्यक्तिगत संवाद अधिक हुआ करता था. आज सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के कारण संवाद का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शिक्षक की जरूरत कम हो गई है. बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में शिक्षक की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. अब शिक्षक को किताबी ज्ञान के साथ छात्रों के व्यक्तित्व, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा.

 

झारखंड के विद्यार्थियों के बारे में डॉ. हसन ने कहा कि यहां के छात्र काफी संयमित और समझदार हैं. विश्वविद्यालयों में छात्र संगठनों की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि छात्र संघ लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और उनकी अपनी भूमिका है. हालांकि किसी भी मतभेद या तनाव को संवाद के माध्यम से सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए.

 

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी छात्र खुद को अकेला न समझे. शिक्षक उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान तलाशने के लिए हमेशा उनके साथ हैं. वहीं शिक्षकों के लिए उन्होंने कहा कि एक अच्छे शिक्षक के लिए केवल अच्छा वक्ता होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे एक अच्छा श्रोता (Active Listener) भी होना चाहिए.

 

डॉ. हसन ने कहा कि छात्रों को भी संयम और धैर्य के साथ अपनी बात रखनी चाहिए. जब शिक्षक छात्रों की बात सक्रियता से सुनें और विद्यार्थी भी धैर्य व संयम के साथ संवाद करें, तो शिक्षक-छात्र के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता कायम हो सकता है. यही संबंध आगे चलकर बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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