पर याद किए गए पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा, कांग्रेसियों ने किया नमन
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनायी पहचान
उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण, त्याग और काबिलियत से अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई. डॉ. मुंडा भारत सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी ऑन झारखंड मैटर के प्रमुख सदस्य थे. उन्हीं के प्रयास से रांची विश्वविद्यालय में आदिवासी और क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना हुई. डॉ मुंडा के प्रयास से ही यूएनओ में लंबी बहस के बाद हर साल नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित हुआ. इस दौरान पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा के सुपुत्र एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुंजल इकीर मुंडा भी मौजूद रहे. डॉ मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर, उन्हें नमन करते हुए गुंजल ने कहा कि डॉ रामदयाल मुंडा अपने आप में एक किताब थे और उस किताब का हर पन्ना झारखंड की माटी की सौंधी खुशबू बिखेरता है. इस दौरान डॉ. रामदयाल मुंडा की पत्नी प्रोफेसर अमिता मुंडा भी मौजूद रहीं. इसे भी पढ़ें- एमपीडब्ल्यू">https://lagatar.in/demand-for-mpw-employees-state-government-should-make-permanent-personnel-who-have-served-for-13-years/">एमपीडब्ल्यूकर्मचारियों की मांग, 13 साल से सेवा देने वाले कर्मियों को स्थायी करे राज्य सरकार डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने कहा कि मुंडा भारत के दलित, आदिवासी एवं दबे-कुचले समाज के स्वाभिमान थे. रांची जिले के एक साधारण गांव से निकलकर देश-दुनिया में उन्होंने झारखंड का मान बढ़ाया. झारखंड आंदोलन के दौरान उनके बौद्धिक विचार युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बने रहे. [wpse_comments_template]

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