कांड : कांग्रेस अनुशासन समिति ने तीनों विधायकों के निलंबन पर लगाई मुहर
`डॉ. रामदयाल मुंडा भेदभाव नहीं करते थे`
प्राध्यापक डॉ रामकिशोर भगत ने कहा कि पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा बगैर किसी भेदभाव के हर वर्ग के व्यक्ति से सहज रूप से उपलब्ध होते थे. उन्होंने झारखंड में झारखंडियत को कायम किया. अपनी बोली, अपनी संस्कृति के प्रति हमेशा सजग रहे. उन्होंने पूरे झारखंड को एक सूत्र में बांधने का काम किया. समन्वय की संस्कृति को प्रगाढ़ किया. क्योंकि संस्कृति हमें एक दूसरे से जोड़ती हैस इस बात को डॉ मुण्डा ने बताया. एक छात्र और ड्राइवर के रूप में बिताये पलों को साझा करते हुए कहा कि पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा विराट व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे. छात्रों को अपने बच्चों से भी अधिक स्नेह, दुलार करते थे.``जे नाची से बांची`` का मूलमंत्र दिया
मुण्डारी विभाग के विभागाध्यक्ष नलय राय ने कहा कि डॉ मुण्डा सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि एक पूरा संस्थान थे. ``जे नाची से बांची`` का मूलमंत्र देने वाले ऐसे महामानव की जीवन से हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है. कहा कि पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा ने पूरे दुनिया में आदिवासियों की पहचान दिलाने का काम किया. पूरी दुनिया के आदिवासियों को एक करने, जोड़ने का भी काम किया. पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा ने झारखंड के आदिवासी और मूलवासियों को एक सूत्र में बांधने का काम किया. वहीं प्राध्यापक मनय मुण्डा ने पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा द्वारा रचित रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनकी रचनाओं ने आदिवासी और मूलवासियों के बीच जागरूकता फैलाया. वे हमेशा हम सबों के लिए एक प्रेरणा के स्रोत के रूप में सदा अमर रहेंगे. इसे भी पढ़ें-साहिबगंज">https://lagatar.in/sahibganj-due-to-inflation-the-beauty-of-the-textile-market-has-faded-the-market-has-shrunk-to-half/">साहिबगंज: महंगाई की मार से कपड़ा बाजार की रौनक फ़ीकी, बाज़ार सिकुड़ कर हुआ आधा

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