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गोस्सनर कॉलेज में डॉ रामदयाल मुंडा जयंती मनाई गयी, वक्ताओं ने कहा, आदिवासी संस्कृति को देश-विदेश में पहुंचाया

Ranchi : गोस्सनर कॉलेज के ऑडिटोरियम में आज शनिवार को पद्मश्री स्वर्गीय डॉरामदयाल मुंडा की 86वीं जयंती धूमधाम से मनाई गयी. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मानव शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ एसके मुर्मू शामिल हुए.  

 

 

 डॉ एसके मुर्मू ने कहा कि डॉ मुंडा न सिर्फ महान कलाकार और साहित्यकार थे, बल्कि वे राजनीति और संस्कृति के भी विद्वान थे. उन्होंने आदिवासी समाज की संस्कृति को देश-विदेश में पहुंचाने का काम किया.

 

 

डॉ मुंडा ने आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया : ज्योति टोप्पो

 

 

संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉm ज्योति टोप्पो ने कहा कि स्व डॉ रामदयाल मुंडा  सरल और मधुर भाषी थे. डॉ योताम कुल्लू ने कहा कि लोगों को डॉ मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर समाजहित में काम करना चाहिए. प्रो हेमंत टोप्पो ने उनके प्रसिद्ध मूल मंत्र जे नाची से बांची.. की व्याख्या की. उन्होंने कहा कि यह आज भी आदिवासी संस्कृति की पहचान बन चुका है.

 

 

डॉ. सलमा केरकेट्टा ने कहा कि डॉ मुंडा छोटानागपुर के इकलौते व्यक्ति थे, जिन्होने मानव जगत में आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया है. प्रो फ्रांसिस मुर्मू ने उनके सहज और सरल स्वभाव को याद किया. 

 

डॉ मुंडा की जीवनी पर किया गया कविता पाठ 

 


विद्यार्थियों ने  मुंडारी गीत प्रस्तुत किये और उनकी जीवनी पर कविता का पाठ  किया. इतिहास विभाग के छात्रों ने उनके जीवन पर विस्तृत व्याख्यान दिया. कार्यक्रम का संचालन क्रिस्टीना हीरो और रोहित भगत ने किया.

 

 

धन्यवाद ज्ञापन मुंडारी विभाग की प्रो मीना सुरीन ने किया. इस मौके पर डॉ एसके. मुर्मू, डॉ ज्योति टोप्पो, डॉ मीना तिर्की,  डॉ. योताम कुल्लू, डॉ सलमा केरकेट्टा, प्रो हेमंत टोप्पो, प्रो फ्रांसिस मुर्मू, प्रो मीना सुरीन, प्रो. अमोस टोपनो समेत विद्यार्थी उपस्थित थे. 

 
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