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द्रौपदी मुर्मू ने कहा, झारखंड की परिश्रमी महिलाएं देश के विकास में योगदान देने में सक्षम हैं

  Khunti: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खूंटी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने की राह दिखाई. उन्होंने कहा कि हम पिछड़े हैं इसलिए सिर्फ इस उम्मीद में हाथ पर हाथ धरे बैठे न रहें कि केंद्र और राज्य सरकार हमारी मदद करेगी. सरकारी सुविधाओं का लाभ उठायें, लेकिन अपनी प्रतिभा और क्षमता को भी निखारें. मेहनत करने से पीछे न हटें. हमे और अच्छा करने के लिए दौड़ना होगा. झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-news/">झारखंड

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सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान काफी नहीं है

द्रौपदी मुर्मू ने  कहा कि सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान काफी नहीं है. शिक्षा और रोजगार जैसी सरकारी योजनाओं का भी लाभ लेना होगा. इसके लिए सरकार आपके पास नहीं आयेगी, आपको भी सरकार के पास जाना होगा. राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें आदिवासी महिला होने पर गर्व है. देश में अपने क्षेत्रों में बेटियों और महिलाओं ने अमूल्य योगदान दिया है. महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं. लोकतंत्र की शक्ति के कारण आज वे राष्ट्रपति के रूप में लोगों के बीच मौजूद हैं. बेटियां, बेटों से अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. राष्ट्रपति भवन में जब पुरस्कार वितरण करते हुए उन्हें महिलाओं की अदम्य ताकत का एहसास हुआ है.

हमें अपने संस्कृति को बचाये रखना है

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज कई क्षेत्र में उदाहरण पेश करते हैं. हमलोग बिना दहेज के अपने घरों में बहू लाते हैं और दूसरे घरों में बिना दहेज के बेटी देते हैं. दूसरे समाज इसका अनुसरण नहीं कर पाते. देश में आज तक दहेज प्रथा खत्म नहीं हो पायी है. दहेज एक राक्षस है. इस संबंध में जनजातीय समाज का उदाहरण पूरे देश में अनुसरनीय है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सम्मेलन से महिलाओं में जागरूकता फैलेगी और आने वाले समय में महिलाएं विकास की गाथा लिखेंगी. राष्ट्रपति ने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर दिया. कहा कि भारत में 700 जनजातियां हैं, लेकिन सबकी संस्कृति और परंपरा अलग है. हमें अपनी संस्कृति को बचाये रखना है, नहीं तो हम दुनिया की भीड़ में खो जायेंगे. अपने बच्चों को भी हमें यही संस्कार देना है. जब हम आगे बढ़ते हैं तो पीछे भी देखना जरूरी है.

राष्ट्रपति के भाषण की प्रमुख बातें

मेरे शरीर में बहता है झारखंड का भी खून मंत्री जोबा मांझी जिस घर की बहू. उसी घर से थीं मेरी दादी हमारे जमाने में वनोत्पाद तो बहुत थे, लेकिन उसके उपयोग लोग नहीं जानते थे आज की महिलाएं सिर्फ धान की खेती पर निर्भर नहीं, महुआ से बना रहीं केक और लड्डू झारखंड के आदिवासी परिवार दूसरे राज्यों के परिवारों से 2 कदम आगे हैं सौभाग्य से इस धरती का राज्यपाल बनने का मौका मिला था झारखंड की महिलाएं काफी परिश्रमी और प्रतिभाशील हैं, वे अपनी प्रतिभा पहचानें महिलाएं देश के आर्थिक विकास में योगदान देने में सक्षम हैं बेटी रानी है, परी है, देवी, दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती है यमुना टुडू, छुटनी महतो जैसे महिलाओं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें महिलाएं खेल के क्षेत्र में झारखंड की बेटियों ने देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया भारत का झंडा ऊंचा करने वाली झारखंड की बेटियों पर गर्व है खुश हूं कि जनजातीय समुदाय के लोग राजनीति में आगे आ रहे हैं अर्जुन मुंडा केंद्र में मंत्री, हेमंत सोरेन सीएम, 28 आदिवासी विधायक हैं स्वयं सहायत समूह की महिलाओं के प्रोड्क्ट गुणवत्तापूर्ण महिलाओं के चेहरे की मुस्कान देख बहुत खुशी हो रही

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