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सालभर में भी DRDA कर्मियों का जिला परिषद या जिला पंचायत में नहीं हो सका विलय

Ranchi : केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को 1 अप्रैल 2022 में बंद कर दिया गया था. केंद्र ने यह जानकारी राज्यों को नवंबर 2021 को ही दे दी थी. उस समय राज्य में सैंकड़ों डीआरडीए कर्मी (जिसे जिला परियोजना पदाधिकारी कहते हैं.) काम कर रहे थे. इनकी नौकरी की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को पत्र लिख कर निर्देश दिया कि सभी कर्मियों को जिला परिषद या जिला पंचायत या अन्य निकायों में विलय किया जाए. कई राज्यों ने ऐसा कर भी दिया, लेकिन झारखंड में स्थिति यह है कि एक साल बाद भी 24 जिलों में संचालित ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को कोई निर्देश जारी नहीं किया. इससे सभी जिला परियोजना पदाधिकारी अपने नौकरी को लेकर आज भी असमंजस में हैं. बीते दिनों झारखंड डीआरडीए कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधिमंडल ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से भी मिला. विभागीय मंत्री ने इन कर्मिंयों के जिला परिषद में जल्द विलय की बात की. लेकिन आज तक इस दिशा में कोई पहल शुरू तक नहीं हुई. इसे भी पढ़ें - भारत">https://lagatar.in/first-ndrf-team-from-india-leaves-for-turkey-relief-material-also-sent/">भारत

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10 माह से बकाया वेतन को लेकर भी संघर्षरत हैं डीआरडीए कर्मी

विलय के अलावा डीआरडीए कर्मी अपने बकाया वेतन को लेकर भी संघर्षरत हैं. इन्हें 10 माह से वेतन नहीं मिला है. बीते दिनों वेतन के अभाव में एक डीआरडीए कर्मी समर प्रकाश की मौत हो गयी. वे जिले में बतौर सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी के तौर पर अपनी सेवा दे रहे थे. वेतन के अभाव में डीआरडीए कर्मी की मौत का उनके सहयोगियों को इतना धक्का लगा कि एक ने तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट कर लिखा – झारखंड की व्यवस्था. आखिर कब मिलेगा डीआरडीए कर्मियों को वेतन. विभागीय मंत्री से मिला आश्वासन, पर विलय पर आज तक कोई पहल नहीं. डीआरडीए कर्मचारी संघ अध्यक्ष मानिक चंद्र प्रजापति का कहना है कि विभागीय मंत्री से मुलाकात में बकाया वेतन को लेकर आश्वासन मिला. अभी तक की जानकारी के मुताबिक, 10 माह के बकाया वेतन की फाइल विभागीय सचिव के पास है. जल्द ही इसका समाधान होगा. हालांकि सभी डीआरडीए कर्मियों के जिला परिषद या पंचायत में विलय को लेकर कोई पहल नहीं हुई.

320 DRDA कर्मियों का जिम्मा मॉनिटरिंग और रिपोर्ट बनाना

बता दें कि राज्य के जिलों में ग्रामीण विकास अभिकरण का कार्यालय है. उपविकास आयुक्त इसके निदेशक होते हैं. ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित सभी योजनाओं का जिला स्तर पर मॉनिटरिंग और रिपोर्ट बनाने का काम इन्हीं डीआरडीए कर्मियों के जिम्मे होता है. राज्यभर में अभी 320 के करीब डीआरडीए कर्मचारी कार्यरत हैं. डीआरडीए बंद होने के बाद इनकी नौकरी पर संकट है. ऐसे में इन्होंने भी सरकार से मांग रखी थी कि जल्द उनके समायोजन पर निर्णय लिया जाये. इसे भी पढ़ें - रिम्स">https://lagatar.in/late-night-flirting-with-female-doctor-rims-angry-medical-students-created-ruckus/">रिम्स

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