Amit Singh Ranchi: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के रुक्का प्रमंडल (स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल) में संदिग्ध निकासी की रकम में लगातार बढोत्तरी हो रही है. पहले 1.32 करोड़ की संदिग्ध निकासी का मामला प्रकाश में आया. एजी ने जांच की तो सदिग्ध निकासी की रकम 20 करोड़ तक पहुंच गई. विशेष टीम की जांच में यह रकम बढ़ कर 23 करोड़ तक पहुंच गई है. जिम्मेवारों का कहना है कि संदिग्ध निकासी के रकम में और बढोत्तरी हो सकती है. जांच के बाद विभाग के कई जिम्मेवार संदिग्ध निकासी मामले में खुद को बचाने में जुट गए है. पेयजल विभाग की विशेष टीम को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौपना था, मगर एक माह से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी विशेष टीम ने रिपोर्ट नहीं सौंपा है. रांची का सदर थाना भी मामले की जांच कर रहा है. मगर थाने को भी जांच में अबतक विशेष जानकारी हाथ नहीं लगी है. जबकि थाने में रुक्का प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा ही करोड़ों के अवैध निकासी का मामला दर्ज कराया गया है. इधर मामले का मुख्य आरोपी रुक्का प्रमंडल का अकाउंटेंट संतोष कुमार फरार है.
एकाउंटेंट के खिलाफ सर्टिफिकेट केस
सरकारी खाते से करोड़ों के संदिग्ध निकासी मामले में मुख्य अरोपी रुक्का प्रमंडल के एकाउंटेंट संतोष कुमार ने 87 लाख रुपए फरवरी माह में जमा कर सबको चौंका दिया. पेयजल विभाग में राशि जमा करने के बाद से संतोष कुमार ट्रैसलेस है. एकाउंटेंट ने राशि जमा कर यह साबित कर दिया है कि स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल के खाते से संदिग्ध निकासी की गई है. अब रुक्का प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर कुमार ने संतोष कुमार के खिलाफ सर्टिफिकेट केस किया है. सतोष कुमार से संदिग्ध निकासी की पूरी रकम वसूलने का आग्रह किया है. ऐसे सामने आया मामला, एजी की रिपोर्ट ने सबको चौंकाया
-रुक्का प्रमंडल में वित्तीय वर्ष 2019-20 से ही संदिग्ध निकासी का खेल चल रहा है. 28 दिसंबर 2023 को प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर ने पेयजल विभाग के मुख्यालय को पत्र लिख कर मामले की जानकारी दी थी. पत्र में बताया था कि लार्सन एंड टूब्रो कंपनी की जगह किसी अन्य को 1.32 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है. -पेयजल विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए एजी से आग्रह किया. एजी की जांच में पता चला कि वर्ष 2022-23 और 2023-24 में कुल 64 चेक से 20 करोड़ की संदिग्ध निकासी कर भुगतान किया गया है. -वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल चार चेक जारी किए गए. सारे चेक 9 मार्च 2023 से 29 दिसंबर 2022 के बीच जारी हुए. इसके जरिए 2.30 करोड़ की निकासी हुई. -वर्ष 2023-24 में कुल 60 चेक से 17.68 करोड़ की निकासी कर भुगतान किया गया है. यह निकासी डीडीओ कोड (आरएनसीडब्लयूएसएस0017) से हुई है. -उक्त कोड चंद्रशेखर (ईईडीडब्ल्यू एंड एसएसएचडब्लयू) के नाम आवंटित है. चंद्रशेखर, रुक्का प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता है. -जिस कोड से राशि की निकासी व भुगतान किया गया है, उसका हिसाब पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट द्वारा नहीं किया गया जा रहा है. -दिसंबर 2022 से नवंबर 2023 की अवधि के दौरान 20 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध भुगतान ईई के कोड से किया गया है. -जिला कोषागार, रांची द्वारा संबंधित पीडब्ल्यूडी डिवीजन को जारी किए गए भुगतान प्रमाणपत्र में दर्ज राशि, जो पीडब्ल्यूडी डिवीजन द्वारा प्रस्तुत फॉर्म 51 के साथ प्राप्त हुई है, जो 64 चेक की सूची से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे हैं. ईडी से जांच कराने का आग्रह
रुक्का प्रमंडल से 23 करोड़ की संदिग्ध निकासी हुई, जिसकी जांच चल रही है. पेयजल विभाग ने थाने में मामला दर्ज कराया है. एजी की जांच में भी करोड़ों के संदिग्ध निकासी का पता चल गया है. इस मामले की विस्तृत जांच के लिए पीएमओ और ग़ृह मंत्रालय को पत्र लिखा गया है. पत्र के माध्यम से पेयजल विभाग में सदिग्ध निकासी से संबंधित मामले लगातार प्रकाश में आ रहे है. प्रदेशभर में अबतक 250 करोड़ से ज्यादा की संदिग्ध निकासी हुई है, जिसे लेकर पेयजल विभाग ने थाने में मामला भी दर्ज कराया है. खूंटी, हजारीबाग, चक्रधरपुर, चाईबासा, रांची और धनबाद में कई मामले अबतक समाने आ चुके हैं. ऐसे गंभीर मामलों की जांच ईडी से कराने पर संदिग्ध निकासी के षडयंत्र में शामिल लोगों का चेहरा उजागर होगा. कपटपूर्ण निकासी के कई मामलों की जानकारी देते हुए शिकायतकर्ता ने बताया है कि दर्जनभर से ज्यादा मामले थाने में पेयजल विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया है. उन मामलों को ईडी जांच के लिए ले सकता है. कहां कितने के अवैध निकासी का मामला आ चुका है सामने
- पेयजल विभाग के हजारीबाग प्रमंडल में 10 करोड़ के अवैध निकासी की गई. - पेयजल विभाग के चाईबासा प्रशाखा मंझारी में 62 हजार का संदिग्ध़ भुगतान किया गया. - पेयजल विभाग चाईबासा के तांतनगर जलापूर्ति योजना में 17 करोड़ के संदिग्ध भुगतान किया गया. - पेयजल विभाग के जमशेदपुर प्रमंडल में 50 लाख 83 हजार और आदित्यपुर प्रमंडल में 66 लाख 16 हजार की अवैध निकासी बताया गया. - महागामा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए 1.64 करोड़ आवंटित हुए. जिसमें से एजेंसी को बिना काम के ही 70 लाख का भुगतान कर दिया गया. वर्जन एकाउंटेंट संतोष कुमार ही मुख्य आरोपी है. मैने जब मामले की जानकारी मुख्यालय को दी, थाने में एफआईआर दर्ज कराया, उसके बाद संतोष कुमार ने मुझे जान से मारने की धमकी दी. अबतक की जांच में 23 करोड़ के संदिग्ध निकासी का पता चल चुका है. रकम में और बढोत्तरी हो सकती है. संतोष कुमार ने फर्जी डीडीओ कोड बनाकर अपने ही खाते में पैसा ट्रांसफर कर लिया है. अब पूरी राशि की वसूली के लिए संतोष कुमार के खिलाफ सर्टिफिकेट केस किया गया है. जिसके बाद उसने 87 लाख रुपए जमा भी किए है. उसके बाद से फरार है. चंद्रशेखर, ईई, रुक्का प्रमंडल [wpse_comments_template]
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