Ranchi : आदिवासी छात्र संघ, रांची कॉलेज (DSPMU) की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) विभाग की शैक्षणिक और सांस्कृतिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की मांग की गई है. यह ज्ञापन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कुलसचिव को संबोधित किया गया है.
आदिवासी छात्र संघ ने अपने आवेदन में बताया कि TRL विभाग में पारंपरिक आदिवासी वाद्य यंत्रों जैसे मांदर, नगाड़ा, बांसुरी, ढोल आदि की भारी कमी है, जिससे छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण में बाधा उत्पन्न हो रही है. संघ ने विश्वविद्यालय से मांग की है कि Purchase Committee की बैठक यथाशीघ्र बुलाकर गुणवत्तापूर्ण वाद्य यंत्रों की खरीद सुनिश्चित की जाए.
इसके साथ ही संघ ने वर्ष में कम से कम चार बार (हर तीन माह में एक बार) विशेष सांस्कृतिक कार्यशाला आयोजित करने की मांग रखी है. इन कार्यशालाओं में राज्य के ख्यातिप्राप्त लोक कलाकारों को प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि छात्र पारंपरिक लोक संगीत और नृत्य की बारीकियों को सीख सकें.
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि इन कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को नागपुरी, मुंडारी, संथाली, कुड़ुख सहित सभी जनजातीय भाषाओं की पारंपरिक गायन, वादन और नृत्य कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाए. इसके सफल संचालन के लिए विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक कोष से विशेष बजट आवंटन की भी मांग की गई है.
आदिवासी छात्र संघ का कहना है कि नियमित सांस्कृतिक गतिविधियों और संसाधनों की उपलब्धता से TRL विभाग के छात्र अपनी गौरवशाली आदिवासी संस्कृति को संरक्षित और आगे बढ़ाने में सक्षम होंगे. संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है.
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