- गांव-शहर में भोर से हीं मचता है शोर
- गर्मी बढ़ने से और गिरा जलस्तर, गहराता जा रहा है जल संकट
लातेहार :
चापाकल, जलमीनार हो गए बेकार
alt="" width="1280" height="963" /> पड़ रही प्रचंड गर्मी के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. चापाकल और जलमीनार अब हाथी के दांत साबित हो रहे हैं. जलस्तर नीचे चले जाने के कारण चापाकलों में कई बार पंप करने के बाद पानी आ रहा है, वह भी आधा और एक बाल्टी भर. ऐसे में लोगों को अपनी बारी आने का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. जलमीनार में पानी नहीं चढ़ पा रहा है. महुआडांड़ के दुरूप पंचायत में भी इन दिनों भीषण जल संकट है. गांव में कई जलमीनार और चापाकल हैं, लेकिन जलस्तर नीचे चले जाने के कारण पानी नहीं आ रहा है. ऐसे में लोग गांव से दो किलोमीटर की दूरी तय कर पास के नदी में जाते हैं और पानी लाते हैं. अब नदी का पानी भी सूख रहा है. ऐसे में लोगों का अंतिम विकल्प चुआंड़ी रहता है.
सूख रहा है नदी का पानी : वीरेंद्र
alt="" width="1280" height="963" /> दुरूप पंचायत के वीरेंद्र मुंडा ने कहा कि चापाकल और सोलर जलमीनार अब दिखावे के लिए रह गये हैं. अब तो नदी का ही सहारा है, लेकिन इस प्रचंड गर्मी में नदी भी सूख गयी है. चुआंड़ी खोद कर काम चला रहे हैं. रतिया मुंडा ने बताया कि जल समस्या को दूर करने के लिए कई बार अधिकारियों को आवेदन दिया गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
पैसों के जुगाड़ में हूं : बीडीओ
प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेन डांग ने कहा कि प्रखंड के सभी पंचायत के जनप्रधिनिधियों के साथ बैठक कर जल समस्या पर चर्चा की गयी है. खराब चापाकल व सोलर जलमीनारों की सूची मांगी गयी है. मुख्यालय से आवंटन आने के बाद पेयजल समस्या दूर करने के लिए कार्य किया जाएगा.जमशेदपुर:
भुइयांडीह के बाबूडीह में पेयजल संकट
alt="" width="1152" height="519" /> जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के भुइंयांडीह बाबूडीह बस्ती में लगाता तीसरे दिन रविवार को भी पानी के लिए लोगों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा. बाबूडीह बस्ती में इस्टर्न पेयजल योजना पार्ट टू के धरातल पर उतरने तक टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा भुइंयाडीह पार्क से दो तीन स्थानों पर सार्वजनिक नल का कनेक्शन दिया गया था लेकिन कुछ बस्ती वासियों द्वारा टाटा स्टील य़ूआईएसएल द्वारा दिए गए कन्क्शन से ही अवैध रुप से अपने घर में कनेक्शन जोड़ लिया गया.जिसके कारण सार्वजनिक नल में पानी का प्रेशर कम हो गया जिसके कारण बस्ती वासियों की परेशानी बढ़ गई. पानी की किल्लत को लेकर बस्ती वासियों ने शनिवार को बर्तन के साथ भुइंयाडीह चौक पर प्रदर्शन किया.जिसके बाद टाटा स्टील यूआईएसएल की टीम मौके पर पहुंची और तकनीकी खामी दूर कर प्रेशर बढ़ाने का प्रयास किया.
तीन डीप बोरिंग भी हैं बेकार
जेएनएसी द्वारा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तीन स्थानों पर डीप बोरिंग कर सार्वजनिक नल लगाया गया है जो बस्ती के 3500 घरों में रहने वाले लोगों के लिए नाकाफी है. सुबह से लोगों को सार्वजनिक नल पर एक बाल्टी पानी के लिए घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है. उल्लेखनीय है की वर्ष 2018 में त्तकालिन मुख्यमंत्री घुवर दास द्वारा इस्टर्न पेयजल योजना पार्ट टू का शिलान्यास किया गया था.इस योजना के तहत टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा वर्ष 2025 तक भुइंयाडीह के बाबूडीह.लाल भट्टा,नंदनगर,ग्वाला बस्ती सहित आस पास के क्षेत्रों में घरों में पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा.इस योजना का शुरुआत 2023 से ही होना है.योजना का धरातल पर उतरने तक टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा अस्थायी तौर पर भुइंयाडीह पार्क से दो तीन स्थानों पर सार्वजनिक नल लगाया गया था ताकि लोगों को पानी मिलता रहे.चक्रधरपुर :
नल जल योजना में अनियमितता
alt="" width="1080" height="523" /> चक्रधरपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र कुलीतोड़ांग पंचायत के गांवों में नल जल योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है. इसकी शिकायत जिला परिषद सदस्य मीना जोंको ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों से की थी. इसकी शिकायत मिलने के बाद बुधवार को कार्यपालक अभियंता प्रभु दयाल मंडल ने अपने मातहत अधिकारियों के साथ कुलीतोड़ांग पंचायत के विभिन्न गांव का दौरा किया. इस दौरान नल जल योजना के कार्यों की जांच की और कई स्थानों पर कार्य में लापरवाही बरते जाने के मामले को सही पाया. जांच में पाया गया कि कुलीतोड़ांग पंचायत के रोबगा गांव में बोरिंग के लिए 80 फीट गड्ढे की जगह 52 फीट ही बोरिंग किया गया है. नापी के बाद कार्यपालक अभियंता ने पुन: बोरिंग करने का आदेश ठेकेदार को दिया.
ग्रामीणों में है नाराजगी
alt="" width="1055" height="553" /> जिला परिषद सदस्य मीना जोंको ने कहा कि कार्य में बरती जा रही लापरवाही को लेकर कई बार ठेकेदार को बेहतर कार्य कराने को कहा गया, लेकिन ठेकेदार द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था. कई जगह पर नल जल योजना के तहत की गई बोरिंग व पाइपलाइन के कार्य में लापरवाही बरती गई है, जिसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. इस दौरान जिप सदस्य मीना जोंको ने पंचायत के धनगांव के बुरुसाई टोला में सर्वे कर हर घर को पानी देने की मांग की. इस पर अधिकारियों ने कहा कि अधिक से अधिक ग्रामीणों को योजना का लाभ दिलाया जाएगा. मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
आदित्यपुर :
वार्ड 20 के गुमटी बस्ती में हाहाकार, खराब है एचवाईडीटी प्लांट
आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 20 में स्थित गुमटी बस्ती में पिछले दिनों से पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है. गुमटी बस्ती में 15 दिन से एचवाईडीटी प्लांट खराब पड़ा हुआ है. बस्ती में करीब डेढ़ सौ परिवार ऐसे हैं जो एचवाईडीटी प्लांट पर निर्भर हैं, प्लांट के खराब होने से सभी परिवारों को परेशानी हो रही है. जबकि वार्ड के पार्षद वीरेंद्र गुप्ता कहते हैं कि प्लांट को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है, मिस्त्री का तबीयत खराब थी, जिससे प्लांट को दुरुस्त करने में समय लगा है.alt="" width="150" height="150" />
गर्मी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है : वीरेंद्र प्रसाद
आदित्यपुर निवासी वीरेंद्र प्रसाद कहते हैं कि 15 दिनों से एचवाईडीटी प्लांट खराब है. बस्ती वासियों को पीने का पानी का भारी किल्लत है. पार्षद से शिकायत की गई तो पार्षद ने कहा कि मेयर विनोद श्रीवास्तव के पास जाएं. हमलोग किसी तरह से अपना काम चला रहे हैं. गर्मी दिन प्रति बढ़ती जा रही है. ऐसे में पानी की किल्लत से हमलोग काफी परेशान हैं.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/19RC_M_59_19042023_1-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />पानी के लिए भटक रही हूं : बबीता देवी
आदित्यपुर की बबीता देवी कहती हैं कि वह 15 दिनों से पानी के लिए दर-दर भटक रहीं हैं. पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. आधा किलोमीटर दूर से पानी लाकर घर का काम काज निपटाना पड़ रहा है. हमारे वार्ड में पार्षद टैंकर भी नहीं मंगवा रहे हैं, जिससे कि बस्तीवासियों का काम चल सके. गुमटी बस्ती के डेढ़ सौ परिवार के करीब 750 लोगों के पास पेयजल की भारी किल्लत हो रही है. alt="" width="150" height="150" />
गर्मी आते ही पानी की किल्लत : आशीष गुप्ता
आदित्यपुर निवासी आशीष गुप्ता कहते हैं कि गर्मी आते ही बस्ती में पानी की किल्लत हो जा रही है. यह सिलसिला पिछले 10 वर्षों से चल रहा है. हमारे वार्ड में 15 साल से वीरेंद्र गुप्ता पार्षद हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस उपाय जलापूर्ति के लिए नहीं हो पाया है. आज भी बस्ती में पानी की समस्या जस का तस बना हुआ है. 15 दिनों से एचवाईडीटी प्लांट का मोटर जला हुआ है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/19RC_M_61_19042023_1-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />पानी की किल्लत नई बात नहीं : गेनौरी ठाकुर
आदित्यपुर निवासी गेनौरी ठाकुर ने कहा है कि गुमटी बस्ती में पानी का किल्लत आज नई बात नहीं है. बस्ती में गर्मी शुरू होते ही पानी की समस्या हो जाती है. पार्षद द्वारा 2 वर्ष पूर्व एक डीप बोरिंग करवा कर एचवाईडीटी प्लांट स्थापित किया गया था, लेकिन वह सुचारू रूप से नहीं चल रहा है. जलापूर्ति योजना भी 5 साल से चल रही है, लेकिन वह भी अधूरी है. गिरिडीह :
पीरटांड़ में जलमीनार और चापाकल चार साल से खराब, पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण
पीरटांड़ प्रखंड के पालगंज पंचायत स्थिति शिव मंदिर में लाखों खर्च कर बनाई गई जल मीनार शोभा की वस्तु बनी हुई है. इस जल मीनार से लोगों को पानी कब मिलेगा,यह कोई नहीं बता पा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि जल मीनार बनने के बाद लोगों को कुछ महीनों तक पानी नसीब हुआ लेकिन अब एक बूंद भी पानी नहीं मिल रहा है. लगभग 4 साल से जल मीनार बंद पड़ी हुई है. गांव के कई मुहल्लों में पानी सप्लाई की पाइप है,लेकिन पानी के लिए ग्रामीण टकटकी लगाए हुए हैं. ठेकेदार और विभाग के बीच लड़ाई में यहां के ग्रामीण पीस रहें हैं.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/AKASH-GUPTA_641-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />समस्या से जूझ रहे लोग : आकाश
ग्रामीण आकाश गुप्ता का कहना है कि पालगंज में कई जलमीनार और चापाकल हैं. इसके बाद भी लोग पानी की समस्या से जूझ रहें हैं. इस दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाया गया तो लोगों को काफी परेशानी होगी. सरकारी स्तर पर दिशा में शीघ्र कदम उठाने की जरुरत है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/ENG-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />जानकारी मिली है : कार्यपालक अभियंता
पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार मंडल ने कहा कि पंचायत में पेयजल की समस्या की जानकारी मिली है. इस पंचायत में पेयजल की कई योजनाएं पूर्ण होने के कगार पर है. जल्द ही लोगों को पेयजल समस्या से निजात मिलेगा. इस दिशा में पहल शुरू कर दी गई है. पर थोड़ा समय लगेगा. चाकुलिया :
नगर पंचायत बाड़े टोला में कुंए से बुझती है प्यास
alt="" width="720" height="417" /> चाकुलिया नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 स्थित सोनाहारा गांव के बाड़े टोला में करीब 16 मुंडा परिवारों की प्यास वर्षों पुराने कुआं के पानी से बुझती है. इस टोला में जलापूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइन सिर्फ दर्शन मात्र के लिए है. यहां डेढ़ साल पूर्व पाइप लाइन बिछाई गई थी. परंतु आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है. ग्रामीणों के मुताबिक टोला में एक चापाकल है. परंतु उसका पानी भी पीने लायक नहीं है. गर्मी में कुआं में भी पानी कम हो गया है. कुआं में खरपतवार नहीं गिरे इसके लिए ग्रामीणों ने कुआं को मच्छरदानी से ढक कर रखा है. ग्रामीणों को नहाने के लिए पक्का घाट तलाब जाना पड़ता है.
घाटशिला :
डाईनमारी में पानी के लिए रो रहे ग्रामीण
alt="" width="1280" height="960" /> गर्मी के दस्तक देते ही प्रखंड के शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल समस्या उत्पन्न हो गई है. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र कालचिती पंचायत के डाईनमारी गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. नदी नाले, कुआं तालाब सूखने के कगार पर हैं, इंसान के साथ-साथ पशुओं को भी पानी के लिए परेशानी होने लगी है. गैर सरकारी संस्था आरडीए के सहयोग से झरना के पानी को पाइप के जरिए गांव के टोला मोहल्ला तक पहुंचाया जा रहा है. जिसके कारण आसपास पंचायत के लोगों को आसानी से पानी उपलब्ध हो जाता है. आरडीए के द्वारा यह व्यवस्था नहीं की गई होती तो यहां पानी के लिए दूसरी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. गांव के मुकुल हेम्ब्रम, मंगल हेम्ब्रम, कोलाई होनहागा, सानगी होनहागा, चित्री हाईबुरु सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि 5 वर्ष पूर्व गांव में पंचायत निधि से एक जल मीनार लगाया गया था जो आज तक शुरू नहीं हो पाया. ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं हुई गांव में एक भी चापाकल ठीक नहीं है सभी चापाकल वर्षों पूर्व लगाए गए थे. वर्तमान में जो चापाकल ठीक किए जा रहे हैं उसका पानी पीने लायक नहीं है. प्रखंड प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग करते हैं कि गांव में पेयजल की उचित व्यवस्था की जाय अन्यथा मई, जून के महीने में पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा.
कतरास :
20 रु. जार पानी खरीदकर पी रहे हैं
alt="" width="474" height="316" /> बाघमारा प्रखंड के सिनीडीह के लोग भीषण पेयजल संकट झेलने को विवश हैं. धरती के अंदर पानी सूख चुका है. कुएं-चापानल सब फेल हो चुके हैं. लोगों को 20 रुपए प्रति जार पानी खरीदना पड़ रहा है. परिवार में रोजाना एक जार के हिसाब से महीने में 600 रुपए पीने के पानी पर खर्च करना पड़ रहा है, जो गरीबों के वश में नहीं है. लेकिन सरकार की ओर से घरों में जलापूर्ति की व्यवस्था आज तक नहीं की गई. वैसे, कोलियरी क्षेत्र होने के कारण इलाके में बीसीसीएल महेशपुर खदान से पानी की आपूर्ति करता है. लेकिन प्रदूषित होने के कारण इसे पीने में उपयोग नहीं किया जाता.गरीब मजबूरी में इसी पानी को पीकर गंभीरी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं.सिनीडीह बस्ती, सिनीडीह कांटाघर से टुंडू मोड़ तक, रिटायरमेंट कॉलोनी, जिंक कॉलोनी, बिलबेरा, जोगीडीह, तेतुलिया, प्रेमनगर, सोनारडीह आदि क्षेत्रों में पेयजल की समस्या काफी गंभीर है.
alt="" width="150" height="150" />
खदान का पानी पीने लायक नहीं : पिंकी
सिनीडीह निवासी पिंकी देवी ने बताया कि इलाके में पानी की समस्या काफी पुरानी है. बीसीसीएल की खदान का पानी खरा है, जिसे पीने में उपयोग नहीं किया जा सकता. वह भी घरों में नियमित नहीं आता है. जार का पानी खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHANCHALA-DEVI_734-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />खरीदकर पानी पीने की मजबूरी : चंचला
बस्ती की चंचला देवी ने बताया कि खरीद कर का पानी पीना यहां के लोगों की मजबूरी है. 20 रुपए जार पानी खरीद रहे हैं. वर्ष 2024 तक मेगा जलापूर्ति के तहत पानी पहुंचाने की चर्चा है, लेकिन काम दिख नहीं रहा है. ऐसे में समस्या का समाधान निकट भविष्य में होगा इसमें संदेह है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/SHANKAR-BURNAWAL_948-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />खदान का पानी भी नियमित नहीं : शंकर
सिनीडीह के शंकर वर्णवाल ने बताया कि कोलियरी क्षेत्र होने के कारण भूगर्भ जल स्तर काफ़ी नीचे चला गया है. इलाके के सभी चापानल, कुएं सूख गए हैं. बीसीसीएल की ओर से खदान के पानी की आपूर्ति भी नियमित नहीं है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/YASHAWAN-KUMAR_572-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" /> हर महीने पानी पर 1000 रु. : यशवंत
यशवंत कुमार ने बताया कि पानी खरीदकर पीना हमारी मजबूरी हो गई है. परिवार बड़ा होने के कारण रोज डेढ़ जार पानी लग जाता है. यानी महीने में करीब 1000 रुपए पानी पर खर्च हो जाता है. समस्या के समाधान के लिए जिम्मेदारों ने अब तक कुछ नहीं किया. हजारीबाग :
झरनों-गड्ढ़ों के पानी से बुझा रहे हैं प्यास , सरकारी स्तर पर कोई प्रयास नहीं
alt="" width="1152" height="864" /> धरातल पर सरकारी योजना का हाल देखना है, तो केरेडारी प्रखंड के अति सुदूरवर्ती बुंडू और पताल पंचायत में देखा जा सकता है. बुंडू पंचायत के हल्दी कोचा गांव में आज तक पेयजल के लिए कुआं, चापाकल अथवा अन्य संसाधन ग्रामीणों को नसीब नहीं हो पाया है. लोग दैनिक जीवन में पानी के लिए झरने या गड्ढोंं में जमा पानी पर निर्भर हैं. कुछ यही हाल केरेडारी प्रखंड की पताल पंचायत में फुलझार और दुमारो गांव का है. केरेडारी का यह गांव भी प्यासा रहता है. दोनों गांवों में नदी, झरने और गड्ढे के सिवा पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है. हल्दी कोचा के ग्रामीण मुकुट तिर्की बताते हैं कि उनके गांव में खिरितिए परिवार के 30 घर हैं. लेकिन आज तक इस गांव में नदी-झरने का पानी पीकर जीवन यापन करते हैं. रौशन तिर्की बताते हैं कि उनके गांव में कोई पदाधिकारी नहीं आता.
alt="" width="150" height="150" />
पानी समस्या पर कोई पहल नहीं हुई: बबलू
फुलझार के ग्रामीण बबलू करमाली कहते हैं कि टुमारो और फुलझर में जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अमला बेखबर है. यहां पानी की समस्या पर कभी कोई पहल नहीं हुई.alt="" width="150" height="150" />
महिलाओं को ज्यादा परेशानी : पुनीत गंझू
लोहारसा के ग्रामीण पुनीत गंझू बताते हैं कि उनके गांव में एक कुंआ है. पर पानी लेने के लिए महिलाओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. सभी परेशान हैं.ब्लॉक अधिकारी भी नहीं सुनते : मुखिया
बुंडू की मुखिया तुलसी तुरी ने कहा कि पंचायत के हल्दी कोचा में पानी अहम समस्या है. सरोना टोला बगोदाबर में एक चापाकल तो है, लेकिन उसमें बदबू बहुत आती है. ग्रामीणों ने कई बार पानी की समस्या को लेकर ब्लॉक के अधिकारियों से बात की, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं हुई.समस्या पर क्या कहते हैं डीडब्ल्यूएसडी के जेई
डीडब्ल्यूएसडी के जेई प्रदीप कुमार तिर्की बताते हैं कि उन्होंने तीनों गांवों का निरीक्षण किया है. अभी तत्काल कुछ दिन पहले टुमारो और फुलझर में बोरिंग हुई है और हल्दी कोचा में पानी की समस्या से उन्होंने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है. जल्द ही समस्या का समाधान होगा.क्या कहती हैं पताल की मुखिया
पताल की मुखिया नेहा लकड़ा ने कहा कि पानी की समस्या का समाधान करने के लिए तैयार हैं. लेकिन जलस्तर नीचे होने के कारण शुद्ध पेयजल के लिए कोई पहल नहीं हुई है.70 परिवार पर महज एक बोरिंग,एक भी कुंआ नहीं
ग्रामीण जगेश्वर मुंडा, मोहन मुंडा, संजय महतो आदि ने बताया कि दोनों गांव में आज तक एक भी कुआं नहीं बना और न ही चापाकल है. विभाग ने एक बोरिंग कराई है. दोनों गांवों में 70 परिवार निवास करते हैं. एक या दो बोरिंग से वे लोग कैसे प्यास बुझा पाएंगे.नदी से पानी लानेवाली महिलाओं की है अपनी पीड़ा
नदी स्थल पर पानी लेने पहुंचीं महिलाओं ने बताया कि उनलोगों को एक किलोमीटर पानी लेने के लिए जाना पड़ता है. बरसात के दिनों में कई दिनों का बासी पानी गर्म कर पीना पड़ता है, जिससे बच्चे बीमारी का शिकार हो जाते हैं.चाईबासा :
पानी के लिए हाहाकार
मझगांव प्रखंड मुख्यालय स्थित मझगांव पंचायत के पांडूकी गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. दूसरे पंचायत के खेत में बने चुआं से पानी लाकर ग्रामवासी प्यास बुझाने को मजबूर है. प्रखंड मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांडूकी गांव विकास के मामले में काफी पिछड़ा हुआ हैं. गांव में लगभग 75 परिवार हैं और लगभग पांच सौ की आबादी है, उस पर मात्र एक चापाकल चालू अवस्था में है. इस पर आधारित एक सोलर जलमीनार पंचायत मद से लगाया गया था. लेकिन एक वर्ष पूर्व ही इस जलमीनार का मोटर भी खराब हो गया. कुछ दिन तक चलने के बाद अब चापाकल भी खराब हो चुका है. गांव की महिलाएं पड़ोस के पंचायत में स्थित सरगरिया नदी के पास खेत में बने चुआं से दूषित पानी लाकर अपना और अपने परिवार की प्यास बुझा रही हैं.alt="" width="150" height="150" />
कई नलकूप वर्षों से खराब पड़े हैं : निरसो
स्थानीय महिला निरसो बिरुवा ने कहा कि पूरे गांव में तीन नलकूप हैं, जिसमें दो कई वर्षों से खराब पड़े हैं. एक नलकूप के भरोसे ही पूरे गांव के लोग हैं. एक वर्ष पूर्व से ही जलमीनार का मोटर भी खराब पड़ा है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/कस्तूरी-चाईबासा-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />नदी के पास बने गड्ढे से पानी लाती हूं : कस्तूरी
ग्रामीण महिला कस्तूरी तिरिया ने कहा कि पानी नहीं रहने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. डेढ़ किलोमीटर दूर नदी के पास बने गड्ढे से पानी लाकर खाना बनाना पड़ रहा हैं. जामताड़ा :
गड्ढे का पानी पीने को विवश
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड में स्थित आदिवासी बहुल गांव फुदगाही एवं बगतरफा गांव में पेयजल संकट है. इन दोनों गांवों के ग्रामीण खेत में बने गड्ढे का पानी पीने को विवश हैं. फुदगाही गांव में 18 परिवारों के करीब 200 सदस्य निवास करते हैं. बगतरफा गांव में 7 परिवारों के करीब 50 सदस्य निवास करते हैं. फुदगाही में तीन चापाकल हैं. इन तीनों चापाकलों में से एक खराब है. दो काम कर रहे हैं. लोगों को पर्याप्त मात्रा में इन दोनों चापकलों से पानी नहीं मिल रहा है. उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय फुदगाही में एक चापाकल है. वहीं बगतरफा आदिवासी टोला में एक भी चापाकल नहीं है. चापाकलों की कमी के कारण पानी की समस्या खड़ी हो गई है. इस दिशा में जल्द कदम उठाया जाना चाहिए.alt="" width="150" height="150" />
पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा :ममीता
फुदगाही गांव की ममीता हेंब्रम ने बताया कि तीन चापाकलों में से एक खराब रहने से ग्रामीणों को पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है. ग्रामीण पानी की किल्लत के कारण मजबूर होकर गड्ढ़े का पानी पी रहे हैं.alt="" width="150" height="150" />
ग्रामीण जल संकट से परेशान हैं : नीता मुर्मू
फुदगाही गांव की नीता मुर्मू का कहना है कि गांव के आदिवासी टोला में एक भी चापाकल नहीं है. ग्रामीण जल संकट से परेशान हैं. खेत में बने गड्ढ़े का पानी पीने को ग्रामीण विवश हैं. पेयजल विभाग गांव में जल संकट जल्द दूर करे.देवघर :
जलस्रोतों के सूखने से बढ़ी परेशानी, बोरिंग फेल, दूर-दूर पानी लाने की मजबूरी
देवघर में पेयजल संकट गहरा गया है. लोगों को पेयजल संकट से जूझता देखा जा रहा है. पानी का बर्तन लेकर लोगों को जल लाने के लिए इधर उधर जाते देखा जा रहा है. कुएं, चापानल, तालाब समेत अन्य जल स्रोत सूखते जा रहे हैं. प्रोफेसर कॉलोनी निवासी नीरज कुमार मिश्रा ने बताया कि जल संकट दूर करने के लिए जिला प्रशासन को ठोस पहल करे. अप्रैल में ही पानी की किल्लत शुरू है. अभी मई और जून माह बाकी है. 22 नंबर वार्ड में ड्राई जोन की स्थिति बन चुकी है. जल स्तर नीचे जाने से बोरिंग काम नहीं कर रहा है.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/NEPALI-TIWARI_596-1-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />मुहल्ले में पानी का संकट: नेपाली तिवारी
देवघर के कृष्णापुरी विलियम्स टाउन निवासी नेपाली तिवारी ने बताया कि जलस्तर नीचे जा चुका है. इससे मुहल्ले में पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है. जल संकट दूर करने को लेकर नगर निगम भी गंभीर नहीं है. हो हल्ला करने के बाद पानी भरे एक-दो टैंकर भेज दिये जाते हैंं. alt="" width="150" height="150" />

Leave a Comment